रांची: कांके क्षेत्र के नगड़ी में प्रस्तावित रिम्स-2 परियोजना के लिए गुरुवार को भूमि पूजन के बाद चहारदीवारी निर्माण हेतु नींव खोदने का कार्य शुरू किया गया। हालांकि, सैकड़ों ग्रामीणों ने निर्माण स्थल पर पहुंचकर बिना ग्रामसभा की अनुमति के कार्य शुरू करने का विरोध करते हुए खुदाई रुकवा दी। ग्रामीणों ने जमीन को अपनी खेती योग्य भूमि बताते हुए परियोजना का निर्माण किसी अन्य स्थान पर बनाने की मांग की। वहीं प्रशासन ने इसे सरकार द्वारा अधिग्रहित भूमि बताते हुए कार्य को वैध बताया। करीब दो घंटे तक विरोध के बाद कांके सीओ अमित भगत के समझाने पर स्थिति सामान्य हुई और निर्माण कार्य दोबारा शुरू कराया गया।
झारखण्ड के पूर्व सीएम Champai Soren ने नगड़ी में प्रस्तावित रिम्स-2 परियोजना का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि सरकार आदिवासियों और मूलवासियों की जमीन छीनने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि कथित भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया कभी पूरी नहीं हुई, न किसानों को मुआवजा मिला और न ही उनका पुनर्वास हुआ। उन्होंने सवाल उठाया कि जब एचईसी और अन्य स्थानों पर पर्याप्त सरकारी भूमि उपलब्ध है, तो खेती योग्य जमीन पर ही अस्पताल बनाने की जिद क्यों की जा रही है। चम्पई सोरेन ने कहा कि शेड्यूल-5 क्षेत्र और सीएनटी एक्ट के तहत संरक्षित भूमि पर आदिवासियों के अधिकारों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि आदिवासी-मूलवासी समाज नगड़ी में महादरबार लगाकर अपनी जमीन बचाने के लिए व्यापक आंदोलन करेगा। चम्पई सोरेन ने एक्स पर लिखा ”यह सरकार जिस भाषा को समझती है, इसे उसी भाषा में समझाया जायेगा। इस तानाशाही सरकार के खिलाफ राज्य भर के आदिवासी मूलवासी नगड़ी में महादरबार लगाएंगे, और लाखों लोग मिल कर इस जमीन को बचाएंगे, इन खेतों में हल चलाएंगे।”




