राँची | पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के नेतृत्व में भू-रैयतों के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात कर बड़कागाँव, केरेडारी और आसपास के इलाकों में जारी गंभीर संकट से अवगत कराया। प्रतिनिधिमंडल ने एनटीपीसी और अडानी जैसी कंपनियों पर भू-रैयतों के शोषण का आरोप लगाया।प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि केरेडारी, चट्टी बरियातू, पकरी बरवाडीह, बादम परियोजना, पतरातु छाई डैम और गोंदलपुरा (अडानी प्रोजेक्ट) जैसे क्षेत्रों में उचित मुआवजा, पुनर्वास और स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं दिया जा रहा है। इन समस्याओं के कारण किसान आंदोलन को मजबूर हैं। साथ ही शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे रैयतों पर पुलिस द्वारा किए गए कथित बर्बर व्यवहार की शिकायत भी राज्यपाल के समक्ष रखी गई।
राज्यपाल ने पूरे मामले को संज्ञान में लेते हुए उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। इस बीच, राज्य कांग्रेस कमेटी द्वारा मामले की जांच के लिए विशेष समिति के गठन और प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के निर्णय को भू-रैयतों के अधिकारों की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि जब तक प्रत्येक प्रभावित परिवार को उसका वाजिब हक, रोजगार और सम्मानजनक पुनर्वास नहीं मिलेगा, आंदोलन जारी रहेगा।




