आदिवासी स्वशासन की दिशा में हेमंत सरकार का ऐतिहासिक कदम

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झारखण्ड : आदिवासी स्वशासन की दिशा में ऐतिहासिक कदम लेते हुए तमाम अड़चनों को दूर कर पेसा (PESA) नियमावली कैबिनेट से स्वीकृत.पेसा कानून आदिवासियों के लिए संविधान का सबसे शक्तिशाली औज़ार है।अधिसूचना जारी होते ही राज्य के अनुसूचित क्षेत्र में पेसा एक्ट लागू होगा और इसके दायरे में 15 जिले होंगे।कैबिनेट सचिव वंदना दादेल ने जानकारी दी कि इस कानून के लागू होने से ग्राम सभाएं अब पहले से कहीं अधिक शक्तिशाली होंगी। नए नियमों के तहत ग्राम पंचायतों को अपने क्षेत्र में खनन अधिकार, भूमि अधिग्रहण और वन भूमि से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण निर्णय लेने का वैधानिक अधिकार प्राप्त होगा। योजना बनाने में ग्राम सभा की भूमिका होगी। पारंपरिक ग्राम सभाओं को अधिकार दिया गया है। सभी ग्राम सभा अपने परंपरा को अधिसूचित करेगी।

पेसा कानून लागू करने वाले 10 राज्यों में शामिल हुआ झारखण्ड : आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान , तेलंगाना और झारखंड

क्या पेसा से आदिवासियों को वास्तविक लाभ हुआ?

शराबबंदी – ओडिशा और महाराष्ट्र:कई आदिवासी ग्राम सभाओं ने शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया;घरेलू हिंसा और गरीबी में कमी आई;महिलाओं की भूमिका मजबूत हुई
लघु वन उपज – महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़:तेंदूपत्ता, महुआ, साल बीज पर ग्राम सभा का नियंत्रण;बिचौलियों की भूमिका कम हुई;
आदिवासियों की आय में सीधी बढ़ोतरी हुई
खनन विरोध – ओडिशा के आदिवासी इलाके:ग्राम सभाओं ने खनन प्रस्तावों को खारिज किया;जंगल, जलस्रोत और आजीविका की रक्षा हुई;यह पेसा की शक्ति का सबसे सशक्त उदाहरण माना जाता है

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