SIR के कारण 19 दिन में 6 राज्यों में 16 BLO की मौत हो गई जिनमें गुजरात-मध्य प्रदेश में 4-4, पश्चिम बंगाल में 3, राजस्थान 2, तमिलनाडु-केरल में 1-1 मौतें हुई. मामले पर अब कांग्रेस ने भाजपा और चुनाव आयोग को घेर लिया है. राहुल गाँधी ने तो इसे सत्ता की रक्षा में लोकतंत्र की बलि तक बता दिया है.
राहुल गांधी: SIR के नाम पर देश भर में अफ़रा-तफ़री मचा रखी है – नतीजा? तीन हफ्तों में 16 BLO की जान चली गई। हार्ट अटैक, तनाव, आत्महत्या – SIR कोई सुधार नहीं, थोपा गया ज़ुल्म है।ECI ने ऐसा सिस्टम बनाया है जिसमें नागरिकों को खुद को तलाशने के लिए 22 साल पुरानी मतदाता सूची के हज़ारों स्कैन पन्ने पलटने पड़ें। मक़सद साफ़ है – सही मतदाता थककर हार जाए, और vote chori बिना रोक-टोक जारी रहे।भारत दुनिया के लिए अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर बनाता है, मगर भारत का चुनाव आयोग आज भी काग़ज़ों का जंगल खड़ा करने पर ही अड़ा है।अगर नीयत साफ़ होती तो लिस्ट डिजिटल, सर्चेबल और मशीन-रीडेबल होती – और ECI 30 दिन की हड़बड़ी में अंधाधुंध काम ठेलने के बजाय उचित समय ले कर पारदर्शिता और जवाबदेही पर ध्यान देता।SIR एक सोची-समझी चाल है – जहां नागरिकों को परेशान किया जा रहा है और BLOs की अनावश्यक दबाव से मौतों को “कॉलैटरल डैमेज” मान कर अनदेखा कर दिया है।यह नाकामी नहीं, षड़यंत्र है – सत्ता की रक्षा में लोकतंत्र की बलि है।
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे: भाजपा की वोट चोरी अब जानलेवा रूप ले चुकी है।काम के भार से BLO और Polling Officers आत्महत्या करने पर मजबूर है।मेरी हर एक परिवार, जिसने अपनों को खोया है, उनको गहरी संवेदनाएं। ज़मीनी हकीकत के मुताबिक़ ये संख्या रिपोर्टों से कहीं अधिक है, जो बेहद चिंताजनक है। इन परिवारों को न्याय कौन दिलाएगा?भाजपा चोरी की सत्ता की मलाई खाने में व्यस्त है और @ECISVEEP मूक दर्शक बने तमाशा देख रहा है।हड़बड़ी में… बिना प्लॉनिंग के जबरन SIR लागू करना नोटबंदी और कोरोना लॉकडाउन की याद दिलाता है।सत्ता का दुरुपयोग कर संस्थानों से आत्महत्या करवाना, संविधान की धज्जियाँ उड़ाना और लोकतंत्र को दुर्बल बनाना भाजपा की सत्ता की भूख का नतीजा है।अब बस !! अगर अभी भी हम नहीं जागे तो लोकतंत्र के आखरी स्तंभों को गिरने से कोई नहीं बचा सकता। जो लोग SIR और वोट चोरी पर चुप हैं वो इन निर्दोष BLOs की मृत्यु के कसूरवार है।आवाज़ उठाइए, लोकतंत्र बचाइए !!
झारखण्ड कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के. राजू: “SIR प्रोसेस के दौरान पश्चिम बंगाल में जो हो रहा है, यानी नाम गायब होना, EPIC डिटेल्स का मेल न खाना, और बूथ दर बूथ वोटर्स का गायब होना, यह एक गहरी साज़िश को दिखाता है। जब हर बूथ से 100-200 लोग अचानक “गायब” हो जाते हैं, तो यह अब कोई क्लर्क की गलती नहीं है। यह चुनावी इंजीनियरिंग है।आज यह बंगाल है, कल यह झारखंड हो सकता है, या कोई और राज्य। हमें ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी की मांग करनी चाहिए, इससे पहले कि चुनाव डेमोक्रेटिक चॉइस के बजाय रस्में बन जाएं।




