झारखण्ड : सरस आजीविका मेला में झारखंड के पारंपरिक व्यंजनों ने विशेष पहचान बनाई। सखी मंडल की महिलाओं द्वारा तैयार किए गए धूसका, दाल पीठा और घूग्नि ने दिल्लीवासियों का दिल जीत लिया। इन व्यंजनों की लोकप्रियता से महिलाओं ने 3 लाख रुपये से अधिक का कारोबार किया। स्वादिष्ट होने के साथ-साथ ये व्यंजन झारखंड की समृद्ध ग्रामीण संस्कृति और खान-पान की परंपरा को भी जीवंत रूप से प्रस्तुत कर रहे थे।मेले के अंतिम दिन झारखंड को लाइव फ़ूड श्रेणी में तीसरे पुरस्कार से सम्मानित किया गया। ग्रामीण विकास मंत्री श्रीमती दीपिका पाण्डेय सिंह ने भी मेले में झारखंडी व्यंजनों का स्वाद चखा और इन महिलाओं का उत्साह बढ़ाया।
ग्रामीण विकास मंत्री, श्रीमती दीपिका पांडे सिंह ने आज दिल्ली में आयोजित सरस आजीविका मेले का दौरा किया और झारखंड के सभी स्टॉल में प्रदर्शित पलाश एवं आदिवा ब्रांड के उत्पादों का अवलोकन किया।जहां पलाश और आदिवा ब्रांड के साथ-साथ झारखंड की हैंडलूम परंपरा और भागैया सिल्क ने भी लोगों का दिल जीता। रागी लड्डू, शुद्ध शहद, काले गेहूं का आटा, अरहर दाल, हर्बल साबुन, लेमन ग्रास ऑइल और पारंपरिक हस्तशिल्प उत्पादों में मेहनत और गुणवत्ता साफ झलकी।उन्होंने कहा, “हमारे राज्य की ग्रामीण महिलाओं की मेहनत और हुनर काबिले तारीफ है। उन्हें राष्ट्रीय मंच पर अपनी कला और उत्पाद प्रदर्शित करने का पूरा अवसर मिलना चाहिए.पलाश ब्रांड और सरस मेला इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है”।मंत्री ने ग्रामीण महिलाओं को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रोत्साहित किया और उनकी कला को और विकसित करने के लिए झारखंड सरकार द्वारा हर संभव सहयोग उपलब्ध कराने का विश्वास दिलाया।




