झारखण्ड की पार्वती ने आदिवा ब्रांड के तहत पारंपरिक झारखंडी आभूषणों को दिलाई राष्ट्रीय पहचान और खुद भी बनी लखपति दीदी…खूंटी के मुरहू प्रखंड की पार्वती सोनी, कभी आजीविका के लिए अपने परिवार के साथ दूसरे की दुकान पर ज्वेलरी बनाने का काम करती थीं। मेहनत तो खूब होती पर आमदनी इतनी कम थी कि परिवार का भरण-पोषण करना भी मुश्किल हो जाता था।जीवन ज्योति महिला मंडल से जुड़ने के बाद पार्वती ने ऋण लेकर अपने परिवार के साथ मिलकर पारंपरिक सिल्वर ज्वेलरी का निर्माण शुरू किया। उनकी कला और लगन को पहचान मिली जब पलाश के सह-ब्रांड आदिवा के तहत उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित आजीविकासरस मेला में भाग लेने का अवसर दिया गया।अब पार्वती हर साल सरस मेले में अपना स्टॉल लगाती हैं, जहाँ उनके पुराने और नए ग्राहक दोनों, खासतौर पर झारखण्ड की पारंपरिक चाँदी की ज्वेलरी खरीदने आते हैं। मेले के दौरान पार्वती की प्रतिदिन 30–40 हजार रूपए तक की बिक्री हो जाती है।कभी आर्थिक तंगी से जूझने वाली पार्वती आज अपनी मेहनत, हुनर और समूह की मदद से न सिर्फ लखपति दीदी बनीं, बल्कि झारखंड की पारंपरिक आभूषणों को राष्ट्रीय मंच पर पहचान भी दिला रही हैं।
सीएम सोरेन ने किया आग्रह :हमारी दीदी-बहनों द्वारा आदिवा ब्राण्ड के अंतर्गत बनायी जा रही ज्वेलरीज को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खूब सराहा जा रहा है।ज्वेलरी ही नहीं, हमारी झारखण्ड की मेहनतकश दीदी-बहनों द्वारा पलाश ब्राण्ड के अंतर्गत निर्मित कई उत्पादों को वैश्विक पहचान मिली है, हमारी मइयां की आजीविका भी मजबूत हुई है।दिल्ली या आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से आग्रह है कि इन स्टाल्स पर पहुंच कर झारखण्ड में निर्मित उत्कृष्ट उत्पादों की खरीदारी जरूर करें।




