झारखंड में मनरेगा अंतर्गत बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत होने वाली आम बागवानी आज किसी परिचय की मोहताज नहीं |इस योजना के तहत उत्पादित आम आज अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भी धूम मचा रहे हैं |इसी तर्ज पर अब मनरेगा के तहत लीची के पौधे भी लगाए जाएंगे|लीची उत्पादन में समय लगता है|अतः इसकी शुरुआत मिश्रित खेती से की जाएगी जिसमें लीची के साथ अमरूद और इमारती पौधे भी लगाए जाएंगे ताकि शुरुआत से ही किसानों को आय मिलने लगे | जिन स्थानों पर पूर्व के वर्षों में सिंचाई की सुविधा रही है, वहां इसे प्राथमिकता दी जायेगी.विभाग का मानना है कि कुछ वर्षों के बाद लीची आय का अच्छा स्रोत हो जायेगी. पांच साल के बाद किसान प्रति हेक्टेयर दो लाख रुपये तक कमा सकेंगे. 10 साल बाद तीन लाख रुपये तक कमाई हो सकती है. बाद में मल्टी लेयर खेती से किसान एक हेक्टेयर में 15 साल बाद चार लाख रुपये कमा सकते हैं.सिमडेगा सहित कई जिलों में मनरेगा के तहत आम्रपाली आम की वेराइटी लगायी गयी थी. इन जिलों में लाखों किसानों को इससे लाभ हो रहा है. हर साल लाखों रुपये का आम किसान बेचते हैं.विभाग ने तय किया है कि इसमें टांड़ जमीन को प्राथमिकता दी जायेगी. वैसी जमीन को चिह्नित किया जायेगा, जहां किसान साल में एक बार कम से कम उड़द, मडुआ व कुल्थी की खेती करते हों. 100 मीटर की दूरी पर सिंचाई का साधन हो.




