रांची : 17 अगस्त 2026 को झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) कार्यालय में क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) ने बड़ी छापेमारी की है।जांच टीम JSSC के सचिव सुधीर गुप्ता से पूछताछ कर रही है और उनके आवास पर भी छापेमारी की खबर है।यह कार्रवाई JSSC-CGL और अन्य भर्ती परीक्षाओं में हुई कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मामलों की जांच के तहत की जा रही है। इस परीक्षा घोटाले में CID अब तक 20 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिसमें JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल खियांगते भी शामिल हैं।
भाजपा ने JSSC में CID की जांच को महज़ एक दिखावा बताया है.भाजपा नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने एक्स पर लिखा,JSSC में CID की जांच महज़ एक दिखावा और आईवॉश है! सचिव सुधीर गुप्ता से पूछताछ करके सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। लेकिन 22 फरवरी 2024 से JSSC के चेयरमैन की कुर्सी पर बैठे प्रशांत कुमार पर CID इतनी मेहरबान क्यों है?सिस्टम में ‘भ्रष्ट’ के रूप में परिचित होने के बावजूद प्रशांत कुमार से कोई पूछताछ क्यों नहीं हो रही है? इनकी गिरफ्तारी की तो बात तक नहीं उठ रही! आखिर ऐसा क्या है जो इन्हें बचाया जा रहा है? क्या इनकी गिरफ्तारी नहीं होनी चाहिए?CID के सर्वेसर्वा मनोज कौशिक जी को यह बताना चाहिए कि उन्हें JSSC के चेयरमैन का पद संभाल रहे प्रशांत कुमार पर इतनी मेहरबानी और दरियादिली क्यों?वो कौन लोग हैं जो प्रशांत कुमार पर हाथ डालने से सीआईडी को रोक रखे हुए हैं? या फिर कहीं ऐसा तो नहीं कि एक दागी द्वारा दूसरे दागी को बचाने के समझौते के तरह “आप मुझे बचायें-मैं आपको बचाउँगा” की रणनीति पर काम हो रहा है?ख्यांगते का उदाहरण हमारे सामने है, जहाँ भ्रष्ट तंत्र हमेशा बड़े अधिकारियों को बचाने में पूरी ताकत झोंक देता है। क्या यहाँ भी वही खेल चल रहा है? मैं फिर कहूँगा कि- सिर्फ मोहरों को मत फंसाओ, सरगनाओं को पकड़ो! तभी इन छात्रों का भरोसा फिर से कायम कर पाने का रास्ता खुलेगा।




