ranchi violence

पूर्व बीजेपी नेता नूपुर शर्मा द्वारा पैगंबर मुहम्मद साहब पर दिए गए आपत्तिजनक बयान के खिलाफ 10 जून को रांची में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान हुए पथराव और फायरिंग कि गई थी। पुलिस द्वारा कि गई फायरिंग में 2 लोगों की मौत और कई अन्य लोगों को गोली लगी थी जिसमें अफसर आलम, साबिर अंसारी, मोहम्मद उस्मान, तबारक कुरैशी और सरफराज भी गोली लगने से घायल हो गए थे और इलाज के बाद पुलिस ने इन सभी पर मुक़दमा दर्ज करके अस्पताल से ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। रांची हिंसा के आरोपी के रूप में रांची केडेलीमार्केट थाना में FIR संख्या 16/2022 में 147, 148, 149, 341, 353, 295A, 153A, 504, और 120B भारतीय दंड सहिंता की संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।

इन सभी और अन्य प्रदर्शनकारियों के मुकदमों की एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स -एपीसीआर मुफ्त कानूनी पैरवी कर रही है।एपीसीआर के अधिवक्ता शमीम अख्तर को सुनने के बाद रांची के माननीय जिला कोर्ट ने पांच लोगों की जमानत अर्ज़ी को सहमति दे दी है चूँकि इन पर तीन मुकदमे और भी दर्ज हैं जिनमे अभी ज़मानत मिलना बाकी है इसलिए इन लोगों को अभी भी जेल में ही रहना होगा,एपीसीआर झारखंड के राज्य सचिव जियाउल्लाह ने बेकसूर, कमज़ोर और मज़लूमो की आवाज़ बनकर उनके इंसाफ दिलाने की अपनी कोशिशें जारी रखने की बात कही है।

एपीसीआर के महासचिव मलिक मोहतसिम खान ने कहा, कानून का शासन को बने रखने के लिए एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (APCR) मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करने की अपनी विरासत को जारी रखेगा। उन्होंने कहा हम आशा करते हैं कि भारत में विभिन्न न्यायालयों में लंबित सैकड़ों अन्य मामलों में मौलिक अधिकारों को इसी तरह सुनिश्चित कराया जाएगा।एसोसिएशन फॉर द प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (APCR) को दृढ़ विश्वास है कि दोषी साबित होने तक प्रत्येक आरोपी व्यक्ति निर्दोष होता है और “जमानत एक नियम है, जेल एक अपवाद है,” जैसा कि भारत की सर्वोच्च न्यायालय अपने ऐतिहासिक फैसले राजस्थान बनाम बालचंद उर्फ ​​बलिया में भी कह चुकी है।

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