नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रविधानों से पंचायत प्रतिनिधियों को अवगत कराया जाएगा, ताकि शिक्षा के विकास में उनकी भागीदारी सुनिश्चित हो सके। पंचायती राज के तीनों स्तरों जिला परिषद, पंचायत समिति तथा ग्राम पंचायत के प्रतिनिधियों को न केवल नीति के प्रविधानों की प्रति भेजी जाएगी, बल्कि उन्हें इससे अवगत कराने के लिए कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
केंद्रीय पंचायती राज सचिव के निर्देश पर झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के निदेशक शैलेश कुमार चौरसिया ने सभी उपायुक्तों को पत्र भेजकर इसे सुनिश्चित करने को कहा है। उन्होंने उपायुक्तों को भेजे गए पत्र में कहा है कि शिक्षा के क्षेत्र में पंचायत प्रतिनिधियों की विशेष भूमिका है। निश्शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम में भी पंचायती राज संस्थान के प्रतिनिधियों को विशेष दायित्व दिया गया है।
अपने क्षेत्राधिकार के अंतर्गत छह से 14 वर्ष के सभी बच्चों का ग्राम शिक्षा रजिस्टर तैयार करना एवं प्रतिवर्ष उसे अपडेट करना, बीच में पढ़ाई छोडऩे वाले बच्चों की पहचान कर उनका फिर से नामांकन कराना, बच्चों को दी जाने वाली सुविधाओं का वितरण तथा शिक्षकों की उपस्थिति की मॉनीटरिंग आदि इसमें शामिल है।
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