रांची: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के झारखंड को भाजपा के लिए “अधूरा एजेंडा” बताए जाने और संथाल परगना में कथित घुसपैठ व जनसांख्यिकीय बदलाव को लेकर दिए गए बयान पर झारखंड की राजनीति गरमा गई है। राज्य सरकार में मंत्री दीपक बिरुआ ने सरमा के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे झारखंड की अस्मिता और सामाजिक सौहार्द पर हमला बताया।हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा था कि पश्चिम बंगाल के बाद झारखंड भाजपा के लिए एक “अधूरा एजेंडा” है। उन्होंने दावा किया कि झारखंड के संथाल परगना क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति पश्चिम बंगाल के बांग्लादेश सीमा से सटे जिलों के निकट होने के कारण कथित अवैध घुसपैठ की आशंका बढ़ाती है, जिससे स्थानीय जनजातीय आबादी और राज्य की जनसांख्यिकी प्रभावित हो रही है।
हिमंत बिस्वा सरमा के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए दीपक बिरुआ ने कहा कि झारखंड किसी का राजनीतिक एजेंडा या प्रयोगशाला नहीं, बल्कि वीर सिदो-कान्हू और भगवान बिरसा मुंडा की पावन धरती है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा झारखंड में नफरत की राजनीति करने का प्रयास कर रही है और राज्य के शांतिपूर्ण माहौल को प्रभावित करना चाहती है।बिरुआ ने यह भी सवाल उठाया कि यदि भाजपा के आरोपों के अनुसार लंबे समय से घुसपैठ हो रही थी, तो राज्य में भाजपा के शासनकाल के दौरान इस पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा केंद्र सरकार के अधीन आने वाली एजेंसियों की जिम्मेदारी है और इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए।उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकार की विभिन्न योजनाओं और पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि 1932 के खतियान आधारित स्थानीय नीति, सरना धर्म कोड की मांग, मंईयां सम्मान योजना और युवाओं के रोजगार जैसे मुद्दों पर राज्य सरकार लगातार काम कर रही है। बिरुआ ने दावा किया कि जनता विकास के एजेंडे के साथ है और विभाजनकारी राजनीति को स्वीकार नहीं करेगी।




