Jharkhand : साहिबगंज, पाकुड़, धनबाद, बोकारो, रांची और चाईबासा जैसे जिलों में अवैध खनन की चर्चा अक्सर होती रहती है, लेकिन लातेहार, चतरा और पलामू के रास्ते बिहार और उत्तर प्रदेश तक चल रही कोयला तस्करी ने राज्य को अरबों रुपये का नुकसान पहुंचाया है। ये कहना है भाजपा नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी का. मरांडी ने पिछले साल 10 नवम्बर, 2025 को भी राज्य के सीएम पर गंभीर आरोप लागते हुए कहा था कि प्रतिदिन हजारों टन कोयला सिर्फ़ एक पलामू के रास्ते बिहार के डेहरी और उत्तर प्रदेश के बनारस पहुंचाया जा रहा है, जिससे प्रतिमाह होने वाली 15 करोड़ रुपये की अवैध कमाई का बँटवारा मुख्यमंत्री, उग्रवादी संगठन और पुलिस अधिकारियों के बीच होता है। आज एक बार फिर मरांडी ने ये मुद्दा उठाते हुए एक्स पर लिखा, मैंने इस मुद्दे को पिछले साल नवंबर में भी उठाया था। उस समय कुछ दिनों के लिए गतिविधियां धीमी पड़ीं, लेकिन हाल के महीनों में यह सिंडिकेट फिर से सक्रिय हो गया है।मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के संरक्षण में राज्य के बड़े अधिकारियों और माफियाओं के साठगांठ से संचालित इस गिरोह का खौफ इतना है कि झारखंड की सीमा तक इन कोयला लदे ट्रकों को कोई रोकने की हिम्मत नहीं करता। यदि कोई समाजसेवी या पत्रकार हिम्मत भी करता है, तो उन्हें धमकियां दी जाने लगती हैं। कतिपय ट्रकों पर बिहार में प्रवेश करने के बाद ही पुलिस कार्रवाई शुरू होती है। मरांडी ने आगे कहा,सिर्फ कोयला ही नहीं, खनन माफियाओं ने डाल्टनगंज-औरंगाबाद को जोड़ने वाले NH के ठीक किनारे स्थित पलामू के छतरपुर में बड़े-बड़े पहाड़ों को पाताल बना दिया है। डीसी, एसपी से लेकर पूरा जिला प्रशासन और रांची में बैठे अधिकारीयों के संरक्षण में यह खेल हो रहा है।




