मणिपुर के सातों पहाड़ी जिलों में रैलियां निकाली गई. एक लाख लोगों ने निम्नलिखित के खिलाफ आदिवासी शांति रैली में भाग लिया:(1)आदिवासियों के अधिकारों और भूमि का हनन;(2) मैतेई एसटी की मांग;(3) मणिपुर सरकार द्वारा जनजातीय गांवों की अवैध बेदखली और विध्वंस.ये ‘आदिवासी एकजुटता रैली’ मेइती समुदाय को एसटी श्रेणी में शामिल करने की मांग के विरोध में निकाली गई थी. ये रैली बुधवार को मणिपुर के एक छात्र संगठन ने बुलाई थी. ऑल ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन मणिपुर (ATSUM) ने इस रैली को बुलाया था.मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में बुधवार को कई घरों को कथित तौर पर जला दिया गया, और स्थानीय निवासियों को दंगे में चोटें आईं।मणिपुर के चुराचंदपुर जिले में एक बार फिर दंगे हुए इस बात को ध्यान में रखकर प्रशासन ने अगले पांच दिन के लिए पूरे राज्य में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी है. राजधानी इम्फाल में धारा 144 लगा दी गई है. चुराचंदपुर और बिष्णुपुर जिलों में कर्फ्यू भी लगा दिया गया है.
झारखण्ड के आदिवासी कल्याण व् परिवहन मंत्री चम्पाई सोरेन ने ट्वीट किया ”मणिपुर से आ रही तस्वीरें चिंतनीय हैं। इस पहाड़ी राज्य में सैकड़ों- हजारों वर्षों से बसे आदिवासियों के घरों को तोड़ा जा रहा है, गाँवों को उजाड़ा जा रहा है। आखिर उनका अपराध क्या है?वहाँ के मेतई समुदाय को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने के विरोध में आदिवासियों द्वारा कल एक बड़ी रैली हुई थी, जिसके बाद उनके घरों को जलाया जा रहा है और उनके साथ हिंसा की जा रही है।माननीय @narendramodi जी, मणिपुर में आपकी पार्टी की सरकार है। कृपया “राज धर्म” का पालन कीजिए।महामहिम राष्ट्रपति महोदया, इन आदिवासियों को आपका साथ चाहिए। कृपया हस्तक्षेप कीजिए।”



