कोर्ट एक 27 साल के युवक की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसने 17 साल की लड़की से शादी की थी और वह गर्भवती हो गई थी। याचिकाकर्ता कहना था कि 15 साल की उम्र के बाद मुस्लिमों के कानून के हिसाब से शादी गुनाह नहीं है।जस्टिस राजेंद्र बादामीकर की बेंच ने याचिकार्ता के तर्कों को खारजि करते हुए कहा है कि ‘ऐसे तर्क कतई स्वीकार नहीं किए जा सकते क्योंकि पॉक्सो ऐक्ट एक विशेष कानून है और इसके मुताबिक 18 साल की उम्र से पहले सेक्शुअल ऐक्टिविटी को इजाजत नहीं दी जाती है।’18 साल से कम उम्र की लड़की का विवाह अमान्य होगा.”देश के कानून से ऊपर मुस्लिम पर्सनल लॉ नहीं”,”हर व्यक्तिगत कानून को ओवरराइड करता है POCSO एक्ट”, कर्नाटक हाई कोर्ट की नाबालिग लड़की की शादी को लेकर टिप्पणी की.



