एक जैसी प्रक्रिया के लिए झारखण्ड गलत और कर्नाटक सही ?

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ek jaisi prakriya ke liye jharkhand galat aur karnatak sahi?

कर्नाटक में एससी-एसटी आरक्षण बढ़ाने को कर्नाटक सरकार ने कैबिनेट से मंजूरी देकर संविधान की 9वीं अनुसूची में शामिल करने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा I इसी प्रक्रिया को झारखण्ड में किया गया जब 1932 को कैबिनेट से पास कराकर विधानसभा में पास किया गया और केंद्र के पास भेजा गया की संविधान की 9वीं अनुसूची में शामिल किया जाए तो भाजपा झारखण्ड सरकार को कह रही है की यह सब पब्लिसिटी स्टंट है , झारखण्ड सरकार झरखंडियो को ठग रही है I

राजनीत में पक्ष विपक्ष की खींचतान चलती रहती है लेकिन जनहित के मुद्दो पर जनता को बरगलाना कितना सही है , जब इसी कार्य को भाजपा शासित प्रदेश कर्नाटक करती है तो वह बिल्कुल सही और जब झारखण्ड में इसी प्रक्रिया को अपनाया जाता है तो विरोध , इन सब के बीच जनता ही पिसती है , भोले भाले गरीब जनता को सही ओर गलत के बीच फर्क करना मुश्किल होता है और इन सबके बीच में ये अपनी राजनैतिक रोटियां सेंकते है और मजा लेते रहते है I

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