जमशेदपुर DC : नशाखोरी व्यक्तिगत नहीं बल्कि सामाजिक समस्या है, नशा विक्रताओं की जानकारी होने पर नजदीकी थाना या प्रशासन के अधिकारियों को सूचित करें

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जमशेदपुर: नशा मुक्त भारत अभियान पर जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन लोयोला स्कूल, ऑडिटोरियम, जमशेदपुर में किया गया.कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में उपायुक्त विजया जाधव शामिल हुईं।कार्यशाला में सीडीपीओ, बीईईओ, महिला पर्यवेक्षिका, कई निजी व सरकारी विद्यालयों के प्राचार्य, नशामुक्ति केंद्र के सदस्य उपस्थित थे.कार्यशाला में विशेषज्ञों ने नशे के दुष्परिणामों, शारीरिक-मानसिक समस्याओं के साथ-साथ समाज में इसके विकृत प्रभावों और नशा मुक्त भारत अभियान के बारे में प्रस्तुतियों और लघु फिल्मों के माध्यम से जनता से व्यक्तिगत रूप से जानकारी साझा की।इस अवसर पर नशामुक्ति विषय पर आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया गया।इस प्रतियोगिता में झारखंड बालिका आवासीय विद्यालय गुड़ाबांदा की फुलेश्वरी मुंडा को प्रथम, केजीबीवी पोटका की छात्रा लक्ष्मी देवी हेम्ब्रम को द्वितीय और केजीबीवी घाटशिला की प्रतिमा सोरेन को तृतीय स्थान मिला.इसके साथ ही उपायुक्त ने नशे के खिलाफ इस लड़ाई को और व्यापक बनाने के लिए हस्ताक्षर अभियान भी चलाया.उपायुक्त विजया जाधव ने कहा कि आज के समय में नशाखोरी व्यक्तिगत या किसी एक परिवार की समस्या नहीं बल्कि एक सामाजिक समस्या बन गई है, इसलिए हम सभी को मिलकर इससे लड़ना होगा।जिले वासियों से अपील है कि आपके पास नशा विक्रताओं की जानकारी हो तो नजदीकी थाना या प्रशासन के अधिकारियों को इसकी सूचना दें।नशा मुक्ति के विरूद्ध इस लड़ाई में जन-जन का सहयोग जरूरी है तभी एक स्वस्थ समाज का निर्माण किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि अक्सर खबरों में देखा या पढ़ा जाता है कि पुलिस ने जमशेदपुर के सीमावर्ती इलाकों या बस्तियों में भी छापेमारी कर नशे के सौदागरों को पकड़ा है.जमशेदपुर नशे का बड़ा उपभोक्ता बाजार बनता जा रहा है, जहां युवा इसकी चपेट में आ रहे हैं. यह एक औद्योगिक शहर है, यहां के लोगों की आय अन्य जगहों की तुलना में अच्छी है, लेकिन इसका दुष्प्रभाव भी है, बच्चों के पास पैसा है इसलिए वे स्कूल के आसपास घूमने वाले नशे के सौदागरों के संपर्क में आते हैं और नशे की लत अपना लेते हैं।उन्होंने अपील की कि नशे के कई नए रूप सामने आए हैं, ऐसे में माता-पिता को भी अपने बच्चों की गतिविधियों और मानसिक बदलावों पर विशेष ध्यान देना चाहिए, ताकि बच्चे को नशे की ओर बढ़ने से पहले या पहले चरण में ही रोका जा सके।

उपायुक्त ने कहा कि नशा मुक्त भारत अभियान को सफल बनाने में प्रशासन, पुलिस प्रशासन, न्याय प्रशासन के साथ-साथ आम नागरिकों से भी सभी का सहयोग अपेक्षित है.साथ ही अभिभावकों के साथ बैठक कर उन्हें प्रशासन की भावनाओं से अवगत कराने की बात कही.अनुमंडल पदाधिकारी धालभूम पीयूष सिन्हा ने कहा कि नशीली दवाओं के तस्करों के खिलाफ केवल प्रशासनिक और पुलिस की कार्रवाई अपर्याप्त होगी जब तक कि समाज का प्रत्येक नागरिक इसके खिलाफ आवाज नहीं उठाता।उन्होंने अपील की कि यदि कोई मादक पदार्थ तस्कर हो तो नजदीकी पुलिस स्टेशन या जिला प्रशासन के अधिकारियों को सूचित करें।

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