सिमडेगा में ₹134 करोड़ की योजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास तथा ₹31 करोड़ की परिसंपत्ति का हुआ वितरण

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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सिमडेगा के कोलेबिरा में आयोजित आपकी योजना, आपकी सरकार, आपके द्वार कार्यक्रम में शामिल हुए। आपकी योजना, आपकी सरकार आपके द्वार अभियान के तहत सिमडेगा में वर्ष 2021 में 45 हजार एवं वर्ष 2022 में 01 लाख 66 हजार से अधिक आवेदन का निष्पादन हुआ।सिमडेगा के कोलेबिरा में आयोजित कार्यक्रम में ₹134 करोड़ की योजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास तथा ₹31 करोड़ की परिसंपत्ति का वितरण हुआ।सीएम ने कहा कोलेबिरा के 7 गांव के लोगों को 1700 एकड़ भूमि का पट्टा दिया जाएगा। अबुआ बीर अबुआ दिशोम अभियान के जरिए व्यक्तिगत एवं सामुदायिक वन पट्टा देने का कार्य हो रहा है। आदिवासी बचेगा, जब जल, जंगल और जमीन रहेगा। कोई भूमिहीन ना रहे। इस लक्ष्य के साथ हम बढ़ रहें हैं.हमारी सोच ग्रामीण क्षेत्र के लिए है। आने वाली पीढ़ी मजबूत हो, इसका प्रयास किया जा रहा है। हमें इस राज्य की जड़, गांव को मजबूत करना है। अगर जड़ मजबूत होगा तो झारखण्ड फलेगा-फूलेगा.400 बच्चों को निःशुल्क कोचिंग प्रदान किया जा रहा है। अलग-अलग जिलों का आंकड़ा अलग-अलग है। आदिम जनजाति के बच्चों को निःशुल्क आवासीय कोचिंग की व्यवस्था की गई है, ताकि आने वाले दिनों में ये युवा आत्मनिर्भर बन अपना नाम रोशन कर सकें.झारखण्ड की जड़ें गांव में ही है। गांव मजबूत होगा तो राज्य भी मजबूत होगा। हमारी सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का काम कर रही है। ग्रामीणों और किसानों के लिए बिरसा हरित ग्राम और पशुधन जैसी योजनाएं शुरू की हैं। पशुधन ही ग्रामीणों का धन होता है। परिवारों के पास पशुधन रहता तो समाज कुपोषण की ओर नहीं बढ़ रहा होता।आज लोग राशन के अनाज पर निर्भर रहने को विवश हैं। पूर्व सरकार में ही सिमडेगा जिले में संतोषी हाथ में राशन कार्ड लेकर भूख से मरने को मजबूर हुई। आपने देखा कोरोना काल में भी आपकी सरकार ने दीदी-बहनों के सहयोग से अपने राज्य के लोगों को पौष्टिक भोजन करवाया। मैं सलाम करता हूं उन सभी दीदी-बहनों को जिन्होंने कोरोना के समय अपनी जान की परवाह किए बगैर सरकार की मदद की और गांव में खाना बना कर ग्रामीणों और श्रमिकों को मुफ्त में खाना खिलाया।आपकी योजना, आपकी सरकार, आपके द्वार कार्यक्रम से हमारे राज्य के लाखों जरूरतमंद लोगों को योजनाओं का लाभ मिल रहा है। विगत 2 साल से हमने सरकार आपके द्वार के अंतर्गत शिविर लगाना शुरू किया, अभी यह तीसरा साल चल रहा है। इससे पहले कोरोना के कारण यह शिविर नहीं लगा पाए थे। कोरोना के समय हुए लॉकडाउन में ही हमें पता चला कि राज्य से हमारे लाखों श्रमिक बाहर काम करने जाते हैं। लॉकडाउन हुआ, जो मजदूर बाहर थे वह वहीं फंस गए। बहुत डरावना मंजर था वह। लेकिन उस समय किसी ने श्रमिक के बारे में नहीं सोचा, यह आपकी झारखण्ड सरकार ही थी जिसने पहले प्लेन और पहली ट्रेन से श्रमिकों को राज्य वापस लाने का काम किया।

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