हूल क्रांति दिवस के दिन भोगनाडीह पहुंचे हेमंत सोरेन

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Hemant Soren

रांची : आज 30 जून को हूल क्रांति दिवस के दिन अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने वाले आदिवासियों की शौर्य गाथा और बलिदान को याद किया जाता है। आज हूल दिवस पर झारखंड के मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन और पूर्व सीएम हेमंत सोरेन और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन भोगनाडीह पहुंचे। हुल दिवस के अवसर पर सिदो कान्हू पार्क में सिदो-कान्हू एवं चांद-भैरव की प्रतिमा पर माल्यार्पण और वीरांगना फूलो- झानो की प्रतिमा का अनावरण कर मुख्यमंत्री Champai Soren पूर्व मुख्यमंत्री Hemant Soren एवं विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन ने श्रद्धांजलि अर्पित किया। पूर्व सीएम हेमंत सोरेन कहते हैं ”शोषकों और अत्याचारियों को लगा था आदिवासी हैं, यह कैसे लड़ पायेंगे, यह षडयंत्र का सामना कैसे कर पायेंगे! इन्हें दबा देंगे तो इनका जल-जंगल-जमीन हथिया लेंगे।इसका जवाब भीषण संथाल हूल विद्रोह था। एक ही परिवार से अमर वीर शहीद सिदो-कान्हू, फूलो-झानो, चांद-भैरव ने असंख्य वीरों और वीरांगनाओं के साथ मिलकर शोषकों की ईंट से ईंट बजा दी थी। उन्होंने अपनी माटी के लिए संघर्ष करना-लड़ना स्वीकार किया, मगर कभी झुकना नहीं।हम झारखण्डवासियों की नसों में वीर पुरुखों का वही क्रांतिकारी खून बह रहा है। शोषकों के खिलाफ न हम कभी झुके थे, न कभी झुकेंगे। हूल विद्रोह जारी रहेगा…हूल विद्रोह के अमर वीर शहीदों की शहादत को शत-शत नमन।अमर वीर शहीद सिदो-कान्हो अमर रहें!झारखण्ड के वीर शहीद अमर रहें!जय झारखण्ड! जय जय झारखण्ड!हूल जोहार!.” उन्होंने कहा ”भोगनाडीह की वीर भूमि को शत-शत नमन।संथाल हूल विद्रोह की क्रांतिकारी भूमि को शत-शत नमन।सौगंध है वीर पुरुखों के खून से सिंचित इस मिट्टी की, झारखण्ड के साथ षड्यंत्र करने वाली तानाशाही ताकतों को चैन से नहीं रहने दूंगा।हूल जोहार!”

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