दिलीप कुमार झारखण्ड की खूबसूरती के दीवाने थे , बीमार मित्र से मिलने राँची भी आये थे और इसके अलावे कई बार झारखण्ड आना हुआ दिलीप साहब का

0

ट्रेजेडी किंग दिलीप कुमार उर्फ यूसुफ खान कल 7/7/2021 को हम सभी को अलविदा कह गए , कई बार दिलीप साहब के बीमार पड़ जाने पर उनके मृत्यु की अफवाह भी फैलाई गई और अंततः लंबी आयु हो जाने के वजह से वे हमें छोड़कर चले गए I दिलीप कुमार जी का झारखण्ड आना कई बार हुआ और वे यहाँ की प्रकृति की सुंदरता के कायल हो गए थे , सबसे पहले वे 1957 में राँची आये I

फ़िल्म निर्माता और उनके मित्र कृष्ण अग्रवाल को टीबी बीमारी हो गई थी तब मुम्बई के डॉक्टरों ने उन्हें सलाह दी कि झारखंड राँची के इटकी में इसका बेहतर इलाज होगा , उस समय कृष्ण अग्रवाल का एक माह यहाँ इलाज चला था , उन्हें ही देखने दिलीप साहब सीधे इटकी के टीबी सेनेटोरियम में आये थे और उन्हें देखकर एक दिन में ही वापस लौट गए थे I

आपको दिलीप कुमार साहब का चर्चित गाना ‘साला मैं तो साहब बन गया ‘ याद होगा जिसे किशोर कुमार ने गाया था लेकिन इसके निर्माता लालपुर के हेमेंद्र गांगुली थे I

शूटिंग छोड़ डालटनगंज आये दिलीप कुमार I

दिलीप कुमार पलामू के सौंदर्य पर मुग्ध हो गए थे। उन्होंने कहा था कि यहां की धरती और लोग ‘इंद्रधनुष’ (कौस ए कुजह) की तरह खूबसूरत हैं। जय जवान संघ के सचिव संजीव नयन बताते हैं, जिस दिन दिलीप कुमार को डालटनगंज आना था, उस दिन गुवाहाटी में किसी फिल्म की शूटिंग चल रही थी। वे शूटिंग में व्यस्त थे और वहीं से उन्होंने सूचना भेजवाई कि‍ वह कार्यक्रम में आने में असमर्थ हैं।

इस पर भुन्नू बाबू ने उनसे किसी तरह संपर्क कर कहा कि शो के सारे टिकट बिक चुके हैं। बाहर से लोग शहर में आ गए हैं। आप नहीं आए तो मैं तो बर्बाद ही हो जाऊंगा। डालटनगंज भी बर्बाद हो जाएगा। लॉ एंड ऑर्डर की समस्या खड़ी हो जाएगी। फिर क्या था, दिलीप कुमार, बोले मैं आ रहा हूं और शाम में उनका चार्टेड प्लेन चियांकी हवाई अड्डे पर उतर चुका था।’

जब डालटनगंज में दिलीप कुमार नाईट का हुआ आयोजन

दिलीप कुमार नाइट का आयोजन डालटगंज में चार मार्च 1984 को हुआ था। इसका आयोजन जयजवान संघ ने सूखा पीड़‍ितों के सहायतार्थ किया था। उन दिनों पलामू सूखे से प्रभावित था। इस संस्था के अध्यक्ष थे भुवनेश्वर प्रसाद उर्फ भुन्नू बाबू। इनके आमंत्रण पर दिलीप कुमार डालटनगंज आए थे। कार्यक्रम में मौजूद डालटनगंज निवासी प्रो. सुभाष चंद्र मिश्रा बताते हैं, ‘यूं तो दिलीप कुमार ट्रैजिडी किंग के नाम से जाने जाते थे पर उनका सेंस ऑफ ह्यूमर भी गजब का था।’

प्रो. मिश्रा यादों को ताजा करते हुए कहते हैं, जब दिलीप कुमार कहते हैं, ‘मेरे साथ मेरी पत्नी सायरा बानो भी आई है। हमारे बीच समझौता है कि घर में ये बोलती हैं और बाहर मैं। प्रत्येक शरीफ आदमी की स्थिति यही है, पति बाहर बोलता है और घर में पत्नी।’ साथ में आए कल्याण जी-आनंद जी की ओर इशारा करते हुए वह कहते हैं, ‘क्या भाई कल्याण जी, आपके साथ भी ऐसा है पर आनंद जी के बारे में मुझे पता नहीं है।’ दिलीप कुमार की बात सुनते ही वहां मौजूद सारे दर्शक ठहाका लगाने लगे।

प्रो मिश्रा आगे बताते हैं कि जब अभिनय को लेकर उनसे सवाल किया गया तो बोले, ‘मुझे फिल्म में मां के निधन का रोल करना था। जो हीरोइन मेरे मां का रोल कर रही थीं, वह सेट पर मेरे संग चाय पी रही थीं। ऐसे में उनके बारे में अभिनय करना मुश्किल था। तब मैंने अपने मन में विचार किया कि जब मेरी मां का निधन हुआ था तो मेरी स्थिति क्या थी। यह बात ध्यान में आते ही मां के मरने के बाद का भाव मेरे चेहरे पर आ गया।’

जब दिलीप साहब ने डालटनगंज में कहा , मैंने अपनी जिंदगी में इतनी भीड़ कभी नहीं देखी

संजीव नयन बताते हैं कि उस कार्यक्रम में दिलीप कुमार, सायरा बानो के अलावा कल्याणजी आनंदजी, अलका याज्ञनिक, सुरेश वाडेकर, अनवर, जाॅनी वाकर, जाॅनी लीवर सरीखे कलाकार आए थे। दिलीप कुमार चिंयकी मैदान में आयोजित कार्यक्रम की भीड़ देखकर काफी उत्साहित हुए। बोले, इतना सुनने वाले, इतना देखने वालों की भीड़ मैंने नहीं देखी। आप सब के बीच आज यहां आया हूं तो इसका श्रेय भुन्नू बाबू को जाता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here