सीएम हेमंत सोरेन:वर्ष 2019 में झारखंड के केवल एक उत्पाद को GI टैग प्राप्त था,अब संख्या 12 हो गई

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hemant soren

रांची: झारखंड की सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में राज्य को बड़ी उपलब्धि मिली है। 11 नए उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्राप्त हुआ है। इनमें कुचाई सिल्क साड़ी एवं फैब्रिक्स, भगैया साड़ी एवं फैब्रिक्स, दुमका चादर-बदोनी पपेट्स, पंछी परहन पंछी साड़ी एवं फैब्रिक्स, तसर सिल्क साड़ी एवं फैब्रिक्स, डोकरा शिल्प, जनजातीय आभूषण, बांस शिल्प, केसरिया कलाकंद, बेनम तथा जादोपटिया पेंटिंग शामिल हैं।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि यह सम्मान राज्य के कारीगरों, बुनकरों, शिल्पकारों, किसानों और आदिवासी समुदायों के परिश्रम, कौशल तथा पारंपरिक ज्ञान की पहचान है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 में झारखंड के केवल एक उत्पाद को GI टैग प्राप्त था, जबकि अब यह संख्या बढ़कर 12 हो गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि GI टैग मिलने से इन उत्पादों को कानूनी संरक्षण मिलेगा, उनकी प्रामाणिकता स्थापित होगी और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नई पहचान के साथ बेहतर आर्थिक अवसर प्राप्त होंगे।उन्होंने यह भी जानकारी दी कि मांदर, पायतकर पेंटिंग, निमुचा/करनी शॉल, देवघर पेड़ा, कुसुमी लाह, लाह की चूड़ियां, साल बीज, महुआ फूल, करंज बीज, रागी, रुगड़ा और धुस्का सहित कई अन्य विशिष्ट उत्पादों के GI टैग की प्रक्रिया जारी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार झारखंड की संस्कृति, परंपरा और लोक ज्ञान के संरक्षण एवं वैश्विक प्रचार-प्रसार के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि स्थानीय उत्पादों को उचित सम्मान और कारीगरों को समृद्धि के नए अवसर मिल सकें।

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