झारखंड में बीजेपी के आधा सांसदों का टिकट कटेगा, जानें क्यों? पलामू और धनबाद सीट पर क्या सम्भावना है

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Ranchi: झारखंड में लोकसभा चुनाव 2024 की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। बीजेपी के सभी सांसद औऱ जो सांसद नहीं है वो भी एक्टिव हो गये हैं। ज्यादातर सांसदों ने अपने संसदीय क्षेत्र में डेरा डाल दिया है। कई सांसद ऐसे हैं जिन्हें इस बात का डर सता रहा है कि पता नहीं पार्टी इस बार उनको टिकट देगी या नहीं। ऐसा इसलिए क्योंकि छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और राजस्थान में नये चेहरों को सामने लाया है, उससे झारखंड में भी सांसदों को डर सता रहा है कि कहीं यह एक्सपेरिमेंट झारखंड में भी ना अपनाया जाए। लोकसभा चुनाव को लेकर भाजपा आधे से अधिक सीटों पर सांसदों के टिकट काट सकती है। वहीं, तय है कि दो सीटों राजमहल व चाईबासा में भाजपा नए उम्मीदवारों पर दांव खेलगी। भाजपा गठबंधन के पास वर्तमान में 12 लोकसभा सीटें हैं। गिरिडीह की सीट 2019 में भाजपा ने आजसू को दे दी थी। आजसू अब हजारीबाग की सीट पर दावा कर रही है। चंद्रप्रकाश चौधरी को 2019 में रवींद्र कुमार पांडेय का टिकट काट कर भाजपा गठबंधन ने आजसू के टिकट पर उम्मीदवार बनाया था।

किन सीटिंग सांसदों को लेकर है संशय
जानकारों के मुताबिक खूंटी में अर्जुन मुंडा, हजारीबाग में जयंत सिन्हा, गोड्डा में निशिकांत दूबे, कोडरमा में अन्नपूर्णा देवी, दुमका में सुनील सोरेन और जमशेदपुर में विद्युत वरण महतो सेफ जोन में में हैं। इन छह सांसदों के अलावा झारखंड में भाजपा के पांच और सांसद हैं। इनमें पलामू में बीडी राम, धनबाद में पीएन सिंह, रांची में संजय सेठ, चतरा में सुनील कुमार सिंह और लोहरदगा में सुदर्शन भगत ऐसे सांसद हैं जिनके लिए दोबारा टिकट पाना आसान नहीं दिख रहा है।

पलामू और धनबाद में सांसद की उम्र बन रही रोड़ा
झारखंड में पलामू व धनबाद संसदीय सीट पर वर्तमान सांसदों की उम्र बाधा बन सकती है। धनबाद सांसद पीएन सिंह जुलाई 2024 में 75 साल के हो जाएंगे। भाजपा ने बीते चुनाव में 75 साल की उम्र सीमा को डेडलाइन बनाते हुए कई वरिष्ठ नेताओं व सांसदों के टिकट काटे थे। ऐसे में धनबाद सीट पर पीएन सिंह की जगह नए उम्मीदवार के नाम पर विचार किया जा सकता है। वहीं, पलामू में भी वर्तमान सांसद बीडी राम की उम्र 73 साल हो चुकी है। इस सीट पर भी बीडी राम के अलावे पूर्व सांसद ब्रजमोहन राम, प्रभात भुईंया, एसटी-एससी आयोग के पूर्व चेयरमैन शिवधारी राम का नाम उभर कर सामने आता रहा है। शिवधारी राम ने हाल ही में अपनी दावेदारी भाजपा प्रभारी लक्ष्मीकांत वाजपेयी के साथ मिलकर रखी थी।

रांची के सांसद संजय सेठ पर 2019 के चुनाव के वक्त तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास की कृपा काम आई थी। उनको रामटहल चौधरी का टिकट काटकर दिया गया था। चर्चा है कि रांची सीट के लिए भीतरखाने कई दावेदार फिल्डिंग कर रहे हैं। जहां तक लोहरदगा के सुदर्शन भगत की बात है तो उन्हें पहली जीत के बाद केंद्र में मंत्री भी बनाया गया था। लेकिन 2019 के बाद वह अलग थलग पड़ गये। उनके जीत का अंतर भी कम था। चर्चा है कि लोहरदगा में आशा लकड़ा रेस में हैं। वहीं कांग्रेस के एक कद्दावर नेता भी अपने पुत्र के लिए भाजपा की टिकट के लिए फिल्डिंग कर रहे हैं। रही बात चतरा की तो सुनील कुमार सिंह की उम्मीदवारी पर 2019 में ही ग्रहण लगता दिखा था। लेकिन शीर्ष नेताओं के आशीर्वाद से उन्हें दोबारा मौका मिल गया। उस सीट पर भी पार्टी के कई नेता नजरें गड़ाए बैठे हैं। करीब करीब तय माना जा रहा है कि गठबंधन के तहत गिरिडीह सीट फिर से आजसू के पास रहेगी।

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