लोक कल्याणकारी राज्य की भावना को पूरा कर रहे हैं हेमंत सोरेन

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राज्य में समूहों को संरक्षण एवं सुरक्षा प्रदान का काम हेमंत सोरेन शासन का बखूबी निभा रही है। हेमंत सोरेन सरकार अपने कामों से लोक कल्याणकारी राज्य की अवधारणा को पूरा कर रहे हैं।झारखंड समाज एफसीकल्याण विभाग अपने सीमित संसाधनों से निःशक्त व्यक्तियों, वरिष्ठ नागरिकों, विधवा एवं परित्यक्त महिलाओं, निराश्रित व्यक्तियों के लिये योजनाओं का क्रियान्वयन करता है। विभाग द्वारा जहां एक ओर वरिष्ठ नागरिकों को उनके अधिकारों के संरक्षण हेतु नियमों का क्रियान्वयन कराया जाता है वहीं दूसरी ओर जो बच्चे परिस्थितियों वश आपराधिक गतिविधियों से जुड़े हैं अथवा जिन्हें देखरेख की अपेक्षा है, उनके पुनर्वास के लिये योजनाएं संचालित की जा रहीं हैं। झारखण्ड राज्य के समाज कल्याण विभाग के द्वारा संचालित किये जा रहे कल्याणकारी कार्यक्रम इस प्रकार से हैं।
मुख्यमंत्री लक्ष्मी लाडली योजना
बेटियों के बारे में समाज में पाई जानेवाली नकारात्मक सोच, लड़कों के मुकाबले उनकी कम होती संख्या बालिका शिक्षा की कमजोर स्थिति बेटियों की जल्दी ब्याह देने की प्रवृति जैसी समस्याओं का निराकरण आदि को देखते हुए लक्ष्मी लाडली योजना राज्य में 15 नवम्बर से चालू किया गया है।
योजना वर्तमान वर्ष 2011 के झारखण्ड स्थापना दिवस अर्थात 15 नवम्बर 2011 से सम्पूर्ण राज्य में लागू हुआ। प्रथम वर्ष उक्त तिथि से एक साल पहले तक यानि 15 नवम्बर 2011 तक जन्मी बालिका को भी इस योजना का लाभ मिल सकेगा।
सरकार क्या करेगी:
झारखण्ड राज्य के प्रत्येक परिवार में संस्थागत प्रसव से उतपन्न प्रथम प्रसव की पुत्री अथवा द्वितीय प्रसव की पुत्री अथवा दोनों प्रसवों से उत्पन पुत्री के नाम से जन्म वर्ष से लेकर लगातार 5 वर्षो तक प्रतिवर्ष 6000/- रूपये की दर से यानि कुल 5 वर्षो में 30000/- रूपये डाक जाम योजना के माध्यम से राज्य सरकार द्वारा विनियोग किया जायेगा। क्या फायदा है:-
बालिका के कक्षा 6 में प्रवेश करने पर 2000/- रूपये का होगा।
गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले सभी वर्ग के परिवारों के लिए पूर्णतः अनुदान पर आधारित “सिद्धू कान्हू आवास योजना” नाम से एक नई योजना राज्य सरकार द्वारा प्रारंभ की गई है।

  1. इस योजना के तहत प्रति आवास 45,000/- रुपये की मानक दर पर राशि उपलब्ध कराई जाती है तथा लाभार्थियों के द्वारा आवास निर्माण स्वयं कराया जाता है।
  2. जिला स्तर पर इस योजना का क्रियान्वयन जिला ग्रामीण विकास अभिकरण तथा प्रखंड स्तर पर प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा लाभार्थियों के माध्यम से कराया जाता है।
  3. लाभार्थियों का चयन ग्राम सभा के द्वारा किया जाता है तथा लाभार्थियों के चयन में जन प्रतिनिधियों का सहयोग लिया जाता है। इस योजना के लिए गांवों के चयन हेतु निम्नलिखित शर्ते होती है:-
    क) चयनित गांवों में परिवारों की संख्या 50 से कम न हो तथा इसकी जनसंख्या 200 से कम न हो।
    ख) अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की संख्या 50 प्रतिशत से कम न हो।
    ग) लाभुकों के चयन में यह सुनिश्चित किया जाना है कि उन्हें पूर्व में इंदिरा आवास योजना / दीनदयाल योजना या किसी भी प्रकार की सरकारी आवास योजना का लाभ नहीं प्रदान किया गया हो।
  4. इस योजना के तहत आवासों का निर्माण इंदिरा आवास योजना की मार्गदर्शिका के अनुरूप ही होता है। इसमें न्यूतम राशि सफाई की व्यवस्था अपरिहार्य है।
    अनु. जाति/जनजाति एवं पिछड़ी जाति के लिए कल्याणकारी योजनायें
    चिकित्सा अनुदान
    गंभीर रोग से पीड़ित व्यक्तियों को अनु० जाति/जनजाति एवं पिछड़ी जाति के गरीब सदस्यों को इलाज हेतु चिकित्सा सहायता राशि अधिकतम 3000/- रुपये तक दिया जाता है। अत्यन्त गंभीर मामले चिकित्सा सहायता प्रदान करने हेतु 10,000/- मात्र तक के अनुदान की स्वीकृति का शक्ति उपायुक्त को प्रत्यायोजित की गई है।
    वैधिक सहायता
    सिविल, क्रिमिनल फौजदारी एवं राजस्व मुकदमों को खर्च वहन करने हेतु गरीब अनु० जाति / जनजाति के सदस्यों को प्रति मुकदमा पर सुनवाई के लिए प्रति दैनिक शुल्क अलग-अलग दैनिक न्यायालयों के लिए अलग- अलग दर निर्धारित किया गया है जो 125 रु० 1250 रु० है । मुकदमा एक पक्ष सरकार न हो एवं मुकदमा गैर अनु० जाति / जनजाति के बीच हो । में
    अत्याचार से राहत
    गैर अनु० जाति/जनजाति द्वारा अनु० जाति / जनजाति के सदस्यों पर अधिनियम के तहत् अत्याचार का मामला होने पर अत्याचार का विभिन्न श्रेणियों में सरकार के मापदण्ड के अनुसार पीडित अनुसूचित जाति/ जनजाति के सदस्यों को आर्थिक सहायता कल्याण विभाग द्वारा दिया जाता है।
    छात्रावास

सरकार क्या करेगी:
झारखण्ड राज्य के प्रत्येक परिवार में संस्थागत प्रसव से उतपन्न प्रथम प्रसव की पुत्री अथवा द्वितीय प्रसव की पुत्री अथवा दोनों प्रसवों से उत्पन पुत्री के नाम से जन्म वर्ष से लेकर लगातार 5 वर्षो तक प्रतिवर्ष 6000/- रूपये की दर से यानि कुल 5 वर्षो में 30000/- रूपये डाक जाम योजना के माध्यम से राज्य सरकार द्वारा विनियोग किया जायेगा। क्या फायदा है:-
बालिका के कक्षा 6 में प्रवेश करने पर 2000/- रूपये का होगा।
गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले सभी वर्ग
के परिवारों के लिए पूर्णतः अनुदान पर आधारित “सिद्धू कान्हू आवास योजना” नाम से एक नई योजना राज्य सरकार द्वारा प्रारंभ की गई है।

  1. इस योजना के तहत प्रति आवास 45,000/- रुपये की मानक दर पर राशि उपलब्ध कराई जाती है तथा लाभार्थियों के द्वारा आवास निर्माण स्वयं कराया जाता है।
  2. जिला स्तर पर इस योजना का क्रियान्वयन जिला ग्रामीण विकास अभिकरण तथा प्रखंड स्तर पर प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा लाभार्थियों के माध्यम से कराया जाता है।
  3. लाभार्थियों का चयन ग्राम सभा के द्वारा किया जाता है तथा लाभार्थियों के चयन में जन प्रतिनिधियों का सहयोग लिया जाता है। इस योजना के लिए गांवों के चयन हेतु निम्नलिखित शर्ते होती है:-
    क) चयनित गांवों में परिवारों की संख्या 50 से कम न हो तथा इसकी जनसंख्या 200 से कम न हो।
    ख) अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की संख्या 50 प्रतिशत से कम न हो।
    ग) लाभुकों के चयन में यह सुनिश्चित किया जाना है कि उन्हें पूर्व में इंदिरा आवास योजना / दीनदयाल योजना या किसी भी प्रकार की सरकारी आवास योजना का लाभ नहीं प्रदान किया गया हो।
  4. इस योजना के तहत आवासों का निर्माण इंदिरा आवास योजना की मार्गदर्शिका के अनुरूप ही होता है। इसमें न्यूतम राशि सफाई की व्यवस्था अपरिहार्य है।
    अनु. जाति/जनजाति एवं पिछड़ी जाति के लिए कल्याणकारी योजनायें
    चिकित्सा अनुदान
    गंभीर रोग से पीड़ित व्यक्तियों को अनु० जाति/जनजाति एवं पिछड़ी जाति के गरीब सदस्यों को इलाज हेतु चिकित्सा सहायता राशि अधिकतम 3000/- रुपये तक दिया जाता है। अत्यन्त गंभीर मामले चिकित्सा सहायता प्रदान करने हेतु 10,000/- मात्र तक के अनुदान की स्वीकृति का शक्ति उपायुक्त को प्रत्यायोजित की गई है।
    वैधिक सहायता
    सिविल, क्रिमिनल फौजदारी एवं राजस्व मुकदमों को खर्च वहन करने हेतु गरीब अनु० जाति / जनजाति के सदस्यों को प्रति मुकदमा पर सुनवाई के लिए प्रति दैनिक शुल्क अलग-अलग दैनिक न्यायालयों के लिए अलग- अलग दर निर्धारित किया गया है जो 125 रु० 1250 रु० है । मुकदमा एक पक्ष सरकार न हो एवं मुकदमा गैर अनु० जाति / जनजाति के बीच हो । में
    अत्याचार से राहत
    गैर अनु० जाति/जनजाति द्वारा अनु० जाति / जनजाति के सदस्यों पर अधिनियम के तहत् अत्याचार का मामला होने पर अत्याचार का विभिन्न श्रेणियों में सरकार के मापदण्ड के अनुसार पीडित अनुसूचित जाति/ जनजाति के सदस्यों को आर्थिक सहायता कल्याण विभाग द्वारा दिया जाता है।
    छात्रावास
    अनु • जनजाति / अनु० जाति/ पिछड़ी जाति एवं अल्पसंख्यकों के लिए स्कूल/कॉलेज तथा विश्विद्यालय तक के छात्र/छात्राओं हेतु संचालित है। इसमें रहने वाले छात्र/छात्राओं को उपस्कर एवं बर्तन तथा खेल कुद की – सामग्री भी उपलब्ध करायी जाती है।
    विद्यालय छात्रवृति
    कल्याण विभाग झारखण्ड सरकार द्वारा सरकारी विद्यालय, मान्यता प्राप्त एवं स्थापना अनुमति प्राप्त विद्यालयों में पढ़नेवाले अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़ी जाति के छात्र/छात्राओं के कल्याण एवं शैक्षणिक विकास की दृष्टि से विद्यालय छात्रवृति की राशि आर्थिक दृष्टि से कमजोर छात्र/छात्राओं को अपनी शिक्षा जारी रखने के लिए प्रदान की जाती है एवं जिला स्तर पर छात्रवृति का वितरण ग्राम शिक्षा समिति / विकास समिति के माध्यम से प्रगति पर है।
    साइकिल वितरण
    सरकारी विद्यालयों में अष्टम वर्ग में अध्ययनरत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ी जाति एवं अल्पसंख्यक समुदाय के छात्र/ अनुसूचित जनजाति अनुसूचित जाति,समुदाय के छात्र/छात्राओं जो गरीबी रेखा से नीचे जीवन बसर करने वाले छात्र/छात्राओं को उच्च विद्यालय में नामांकन के बाद पढ़ाई छोड़ने से रोकने के उद्देश्य से कल्याण विभाग द्वारा निःशुल्क साइकिल दिया जाता है।
    मुख्यमंत्री खाद्य सुरक्षा योजना
    सभी अल्पसंख्यक आदिम जाति परिवारों को प्रति परिवार प्रत्येक माह 35 किलो मुत अनाज उपलब्ध कराया जाता है। झारखण्ड के संबंधित जिलों में योजना के तहत परिवारों को इस योजना से लाभन्वित किया जा रहा है।
    प्रवेशिकोत्तर छात्रवृति
    अनुसूचित जाति/जनजाति / पिछड़ी जाति के छात्र – छात्राएँ जो विधिवत मान्यता प्राप्त महाविद्यालय / संस्थानों में अध्ययनरत है को पोस्ट मैट्रिक योजना अन्तर्गत, छात्रवृति एवं शिक्षण शुल्क विविध शुल्क का भुगतान किया जाता है।
    गैर सरकारी संस्था द्वारा कल्याणकारी कार्यक्रम
    विभाग द्वारा प्राप्त गैर सरकारी, संस्थाओं के परियोजना प्रस्तावों का – जाँच जिला स्तर पर की जाती है तथा जाँच प्रतिवेदन एवं परियोजना प्रस्ताव उपायुक्त की अनुशंसा से कल्याण विभाग को भेजा जाता है।
    निदेशालय स्तर पर उक्त प्रस्ताव की स्क्रिनिंग समिति की बैठक में पारित करने के उपरांत संस्थाओं को सीधे राशि मुहैया करायी जाती है।
    वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत कार्यक्रम
    अनुसूचित जन जाति एवं अन्य परम्परागत वन निवासी (वन अधिकार की मान्यता) अधिनियम, 2006 अन्तर्गत व्यक्तिगत एवं सामुहिक दावे जैसे वन भूमि में परम्परागत चारागाह, कन्द-मूल, चारा, वन्य खाद्य फल और अन्य लघु वन उत्पाद उपयोग तथा जमा करने के क्षेत्र, मछली पकड़ने के स्थान, सिंचाई प्रणालियां, मानव तथा पशुधन के उपयोग के लिए जल स्त्रोत, औषधीय पौधों का संग्रह तथा जड़ी-बुटी औषधी व्यवसायिक क्षेत्रों को सामुदायिक दावे के अन्तर्गत पट्टा दिये जाने का प्रावधान है। इस योजना से अल्प संख्यक आदिम जन जाति के सभी परिवारों को लाभान्वित किये जाने का प्रयास किया जा रहा है। योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु जिला स्तर एवं प्रखण्ड स्तर पर भी कार्यशाला आयोजित कर लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
    सामाजिक सुरक्षा संबंधी योजनायें
    इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय वृद्धापेंशन योजना
    राष्ट्रीय वृद्धापेंशन योजना 15 अगस्त 1995 से केन्द्र सरकार द्वारा प्रारम्भ किया गया। योजनान्तर्गत राज्य के सभी जिलों का लक्ष्य बी0 पी0 एल0 परिवारों की संख्या के आधार पर निर्धारित किया गया एवं तत्काल केन्द्रांश 75/- पचहत्तर रूपये एवं राज्यांश 25/–पचीस रूपये कुल एक सौ रूपये प्रतिमाह के दर से प्रति पेंशनधारी को पेंशन भुगतान किया जाता रहा है।
    वर्ष 1998 में पेंशन राशि 200/– दो सौ रूपये के दर से केन्द्र सरकार द्वारा पेंशन भुगतान राज्य सरकार के माध्यम से किया जाता था।
    वर्तमान 19 नवम्बर 2007 से इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय वृद्धापेंशन योजना लागू किया गया। योजनान्तर्गत वर्ष 2002 के सर्वेक्षित बी० पी० एल० परिवार के 65 वर्ष एवं अधिक आयु के सभी वृद्धों को केन्द्रांश 200/– दो सौ रूपये एवं राज्यांश 200/–दो सौ रूपये कुल 400/- चार सौ रूपये के दर से मासिक पेंशन भुगतान पेंशनधारियों के बैंक खाता/ डाकघर बचत खाता के माध्यम से किया जाता है। राज्य सरकार एवं केन्द्र सरकार द्वारा 50:50 अनुपात में व्यय होता है। योजनान्तर्गत जनजातीय उपयोजना एवं अनुसूचित जाति के विशेष अंगीभूत उप- योजना का अलग-अलग मद में राशि का व्यय किया जाता है।
    इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना
    योजनान्तर्गत वर्ष 2002 में सर्वेक्षित बी0 पी0 एल0 परिवार के ग्रामीण / शहरी क्षेत्र के असहाय विधवा जिनकी आयु 40 वर्ष से 64 वर्ष के अन्तर्गत हों एवं वार्षिक आय 5000/- पाँच हजार रूपये ग्रामीण क्षेत्र में एवं 5500/- पाँच हजार पाँच सौ) शहरी क्षेत्र के अन्तर्गत हो । प्रत्येक विधवा को 400/- चार सौ रू0 मासिक पेंशन राशि भुगतान करने का प्रावधान है। केन्द्र प्रायोजित योजनान्तर्गत योग्य लाभुकों का चयन अं कार्यालय द्वारा किया जा रहा है। असहाय एवं निर्धन विधवा जो योजना के आहर्ता को पूर्ण करते है वे अपने अंचल कार्यालय में आवेदन देंगें।
    राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना
    योजनान्तर्गत गरीबी रेखा के अन्तर्गत जीवन यापन करने वाले परिवार के अर्जनकर्ता सदस्य जिनका आयु 18 वर्ष से अधिक एवं 65 वर्ष से कम हो प्राकृतिक कारण या दुर्घटना से मृत्यु होने पर मृतक के आश्रित को एक मुफ्त कुल 10,000/- (दस हजार) रूपये अनुदान भुगतान किया जाता है। योजनान्तर्गत जनजातीय उपयोजना एवं अनुसूचित जाति के विशेष अंगीभूत उप योजनान्तर्गत अलग-अलग श्रेणी के लाभूकों को अनुदान भुगतान किया जाता है।
    बन्धुआ मजदूरी प्रथम उन्मूलन एवं पुनर्वास योजना
    बन्धुआ मजदूरी प्रथम उन्मूलन अधिनियम 1976 के अन्तर्गत किसी भी व्यक्ति को बन्धुआ मजदूरी के रूप से कार्य कराना गैर कानूनी एवं दण्डनीय अपराध है । बन्धुआ मजदूर के रूप में कार्य कराते हुए पाया जायगा तो ऐसे नियोजक के विरूद्ध जुर्माना एवं दंड की कार्रवाई किया जायगा। बशर्ते मालिक द्वारा किसी मजदूर को कार्य कराने हेतु बाध्य करता हो एवं मजदूर को स्वेच्छा से अन्यत्र कार्य करने नहीं देता एवं न्यूनतम मजदूरी भुगतान नहीं करता हो
    राज्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना
    राज्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना वर्ष 1979 में राज्य सरकार द्वार लागू किया गया एवं जिला के उपायुक्त को स्वीकृति एवं व्ययन पदाधिकारी अधिसूचित किया गया। हेमंत सोरेन सरकार इन सारी योजनाओं पर जमीनी स्तर पर काम कर यार खंड राज्य को एक लोक कल्याणकारी राज्य बना रही है ।झारखंड सरकार समय-समय सरकार आपके द्वार और कई अन्य कार्यक्रमों के द्वारा आम जनता तक अपनी पहुंच बनाती है।

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