हेमंत सोरेन ( hemant soren ) ने बता दिया, यह झारखंड है ना कि मध्य प्रदेश, कर्नाटक या महाराष्ट्र जैसा राज्य

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Ranchi – hemant soren : झारखंड में पिछले तीन सालों की विपक्ष की साजिश और फरवरी से चल रहे सियासी संकट के बीच सोमवार को हेमंत सरकार के लिए एक बहुत बड़ी राहत की खबर आई. सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लीज आवंटन और उनके भाई बसंत सोरेन के करीबियों द्वारा शेल कंपनी में निवेश को लेकर झारखंड हाई कोर्ट में दाखिल याचिकाओं को सुनवाई योग्य नहीं माना. इससे झारखंड में विपक्ष औंधे मुंह गिर गया. करीब साढ़े तीन माह के बाद हेमंत सरकार को दूसरी बड़ी राहत मिली है. इससे पहले 31 जुलाई 2022 को मुख्यमंत्री के सहयोगी कांग्रेस के कारण झारखंड में भाजपा का ऑपरेशन लोटस योजना को पूरी तरह फेल किया गया था. अब सुप्रीम कोर्ट ने भी हाई कोर्ट को मुख्यमंत्री के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई योग्य नहीं बताकर अप्रत्यक्ष रूप से विपक्ष यानी भाजपा को एक तरह से फटकार लगा दी है.

हेमंत सोरेन ( hemant soren ) ने बता दिया कि यह झारखंड है – महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश नहीं.

सुप्रीम कोर्ट के सोमवार के फैसले के बाद अब यह तय हो गया है कि झारखंड में हेमंत सोरेन ( hemant soren ) सरकार पूरी तरह से सुरक्षित है. मुख्यमंत्री के सुनियोजित रणनीति से जहां झारखंड में पहले ऑपरेशन लोटस की कोशिश को रोक बेनकाब किया गया. इसे बेनकाब करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बता दिया था कि यह झारखंड है ना कि मध्यप्रदेश, कर्नाटक या महाराष्ट्र. झामुमो पार्टी के कार्यकर्ता या नेता अपने सुप्रीमो का साथ कभी नहीं छोड़ेगे. झारखंड का हर कार्यकर्ता अपने नेता के प्रति समर्पित है. यही समर्पण का भाव है कि मुख्यमंत्री को जैसे ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने समन भेजा, कार्यकर्ता और आम जनता सड़कों पर उतर आई. कार्यकर्ता और राज्य की जनता ने यह बता दिया कि चुनाव आयोग का जो भी फैसला आएगा, इससे लड़ने के लिए वे अपने नेता हेमंत सोरेन के नेतृत्व में लड़ने को पूरी तरह से तैयार है.

कांग्रेस नेतृत्व ने झारखंड सरकार गिराने को लेकर असम की भाजपा सरकार पर लगाया था आरोप.

इससे पहले 31 जुलाई 2022 को कांग्रेस पार्टी के तीन विधायक को कोलकाता गैस कांड को लेकर कोलकाता पुलिस ने गिरफ्तार किया था. बाद में तीनों विधायकों को कांग्रेस ने निलंबित कर दिया. पार्टी की तरफ से कहा गया कि झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार, जिसे कांग्रेस समर्थन दे रही है, उसे ऑपरेशन लोटस के तहत गिराने की साजिश रची गई, जिसे असफल कर दिया गया. प्रदेश कांग्रेस ने आरोप लगाया कि असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा इस घटनाक्रम के पीछे हैं. नेतृत्व ने आरोप लगाया कि भाजपा ने जो महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में किया, वही झारखंड में दोहराने की कोशिश की जा रही है.

हेमंत सोरेन ( hemant soren ) एक मजबूत और सशक्त विपक्ष की भूमिका निभाते हुए जनता की आवाज को उठाने का काम किया.

यह सभी जानते हैं, राज्य बनने के बाद झारखंड कभी भी स्थिर नहीं रह पाया. सरकार बनने के बाद से यह कब गिर जाएगी, इसका आकलन किया जाता था. पहली बार भाजपा नेतृत्व वाली रघुवर सरकार ने 5 साल का कार्यकाल पूरा किया. उस समय हेमंत सोरेन एक मजबूत और सशक्त विपक्ष की भूमिका निभाते हुए जनता की आवाज को उठाने का काम किया.

सड़क से सदन तक और सदन से न्यायपालिका तक कार्यकर्ता लड़ते रहे जिसका रिजल्ट है आज की जीत.

28 दिसंबर 2019 को सत्ता पर काबिज हुई हेमंत सोरेन के नेतृत्व में यूपीए की सरकार के पास पूर्ण बहुमत है, यह बात विपक्ष (भाजपा) पूरी तरह जानती थी. 81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 41 का आंकड़ा चाहिए, जबकि हेमंत सोरेन के पास 48 का पर्याप्त आंकड़ा था. इसमें 30 विधायक झामुमो के और 18 विधायक कांग्रेस के और 1 राजद का हैं. इस पर्याप्त बहुमत के कारण यह मान लिया गया था कि झारखंड अब राजनीतिक अस्थिरता के दौर से निकल चुका है. लेकिन इस संख्या-बल के बावजूद झारखंड में राजनीतिक अनिश्चितता कायम दिखी. कारण – विपक्ष की साजिश और सरकार को अस्थिर करने का प्रयास. है. इसका सीधा असर राज्य के विकास और सरकार के कार्यों पर देखा गया.
इसके बावजूद पर्याप्त बहुमत होने के कारण यूपीए नेता और कार्यकर्ता कार्यकर्ता सड़क से लेकर सदन तक और सदन से लेकर न्यायपालिका तक विपक्ष के साजिश के खिलाफ लड़ाई लड़ते रहे. इसी का असर है कि आज न्यायपालिका से हेमंत सोरेन सरकार को एक बड़ी जीत मिली है.

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