उत्तर प्रदेश और केंद्र की सरकार को बदनाम करने और अपनी राजनीति चमकाने को लेकर कॉन्ग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के लिए हाथरस मुख्य मुद्दा बना हुआ है। हाथरस मामले की जाँच उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा गठित एक एसआईटी द्वारा की जा रही थी। मामले की गंभीरता और पूरे देश मे फैले आक्रोश को देखते हुए योगी सरकार ने अब इसकी जाँच सीबीआई से कराने का फैसला किया है।
जहाँ एक तरफ उत्तरप्रदेश योगी सरकार ने मामले की गंभीरता समझते हुए मामले को सीबीआई को सौंपने का फैसला किया है, वहीं इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए मृतका के भाई ने कहा कि इसकी जरूरत नहीं थी। रिपोर्ट के अनुसार, मृतका के भाई ने कहा कि उन्होंने सीबीआई जाँच की माँग नहीं की, क्योंकि एसआईटी जाँच पहले से ही चल रही है। अब परिवार सुप्रीम कोर्ट के तहत न्यायिक जाँच की माँग कर रहा है। पीड़ित के भाई ने 3 अक्टूबर को फिर से कहा कि वे चल रही जाँच से संतुष्ट नहीं हैं। एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा, “हम चल रहे जाँच से संतुष्ट नहीं हैं, क्योंकि हमें अब तक हमारे सवालों के जवाब नहीं मिले हैं। खुले तौर पर हमें धमकी देने वाले डीएम को अभी तक निलंबित नहीं किया गया है।” वहीं सीएम योगी आदित्यनाथ ने एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद एसपी, डीएसपी, इंस्पेक्टर और कुछ अन्य अधिकारियों के निलंबन आदेश दिए थे।



