रामगढ़: केंद्र सरकार के प्रस्तावित खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 के विरोध में रामगढ़ में जिला कांग्रेस कमेटी के तत्वावधान में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री अम्बा प्रसाद समेत पार्टी के वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए।धरना-प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार की खनिज एवं प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ी नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और विधेयक को झारखंड के हितों के विरुद्ध बताया। रामगढ़ के अलावा दुमका, हजारीबाग, चाईबासा (पश्चिमी सिंहभूम), गुमला और पूर्वी सिंहभूम सहित राज्य के सभी 24 जिलों के कलेक्ट्रेट के समक्ष कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।
जामताड़ा में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. Irfan Ansari ने भाजपा पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि झारखंड के खनिज और आर्थिक अधिकारों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा।उन्होंने कहा, “झारखंड का हक नहीं छिनने देंगे, जनता की आवाज नहीं दबने देंगे। MMDR एक्ट वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन और तेज होगा—अभी तो झांकी है, पिक्चर अभी बाकी है।”
रामगढ़ में अम्बा प्रसाद ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियां कॉर्पोरेट हितों को बढ़ावा देने वाली हैं, जिसका सीधा असर झारखंड के जल, जंगल और जमीन पर पड़ रहा है।उन्होंने कहा कि खनिज संपदा के दोहन के नाम पर स्थानीय लोगों के विस्थापन, पर्यावरण प्रदूषण और राज्य के आर्थिक हितों की अनदेखी को स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने केंद्र पर झारखंड के राजस्व और सेस से जुड़े अधिकारों को प्रभावित करने का भी आरोप लगाया।अम्बा प्रसाद ने कहा कि झारखंड के खनिज एवं प्राकृतिक संसाधनों पर पहला अधिकार राज्य की जनता और राज्य सरकार का होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन से जुड़े संवैधानिक एवं पारंपरिक अधिकारों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा।धरना-प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार से प्रस्तावित संशोधन विधेयक पर पुनर्विचार करने और झारखंड के हितों एवं राज्य के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।अम्बा प्रसाद ने कहा कि राज्य के स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए कांग्रेस का संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने “झारखंड का खनिज, झारखंड का अधिकार” जैसे नारे लगाते हुए केंद्र सरकार की नीतियों का विरोध किया।




