कांग्रेस: CBI को सौंपी गई जांचों में दोषसिद्धि का रिकॉर्ड शून्य रहा है, CID से डर रही भाजपा

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dipika pande singh

रांची : आज (12 अगस्त 2026) को रांची में कांग्रेस के चार मंत्रियों (दीपिका पांडे सिंह, इरफान अंसारी, राधा कृष्ण किशोर और शिल्पी नेहा तिर्की) ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस (PC) की। इस पीसी में मंत्रियों ने JPSC और JSSC परीक्षा विवाद को लेकर विपक्ष (BJP) पर तीखा हमला बोला है।मंत्रियों ने आरोप लगाया कि BJP राज्य की CID जांच का विरोध इसलिए कर रही है ताकि उनका खुद का कोई चेहरा बेनकाब न हो जाए।2015 के बाद से कम से कम 17 बड़े परीक्षा घोटालों की जांच CBI को दी गई।मंत्रियों के मुताबिक, 2015 के बाद के इन 17 मामलों में CBI अपनी जांच के दम पर एक भी आरोपी को सजा दिलाने में नाकाम रही है।

मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने कहा, परीक्षा घोटालों में CBI पर भरोसा क्यों नहीं? 2015 से अब तक 152 पेपर लीक के मामले सामने आए हैं। 2015 के बाद से कम से कम 17 परीक्षा घोटालों की जांच CBI को सौंपी गई। लेकिन इन मामलों में CBI की अपनी जांच के आधार पर दोषसिद्धि का रिकॉर्ड शून्य है। CBI ने NEET-UG 2024, UGC-NET 2024, SSC CGL 2017, JEE Main 2021, WB SSC 2016, HP Police Constable 2022, Army CEE 2017, Karnataka PSI 2021 समेत कम से कम नौ अन्य परीक्षा घोटालों की जांच की है। NEET-UG 2024 में CBI 90 दिनों की चार्जशीट दाखिल करने की समयसीमा चूक गई, जिसके चलते एक प्रमुख आरोपी को डिफॉल्ट बेल मिल गई। UGC-NET 2024 में CBI ने कथित पेपर लीक की जांच के बाद क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की और कहा कि जिस स्क्रीनशॉट को लीक का सबूत बताया गया था, वह छेड़छाड़ किया हुआ था। जुलाई 2026 में बहुप्रचारित फास्ट-ट्रैक कोर्ट की पहली सुनवाई में CBI का वकील तक मौजूद नहीं था। और 2015 के बाद के इन तमाम मामलों में सिर्फ एक दोषसिद्धि हुई है Haryana Judicial Services 2017 मामले में। लेकिन इस मामले में जांच CBI ने नहीं, बल्कि चंडीगढ़ SIT ने की थी। दिल्ली की अदालत ने अगस्त 2024 में फैसला सुनाया। जब परीक्षा व्यवस्था पर लाखों छात्रों का भविष्य निर्भर हो, तो सवाल सिर्फ जांच का नहीं नतीजे का है। जिस एजेंसी का परीक्षा घोटालों में दोषसिद्धि का रिकॉर्ड शून्य हो, क्या उसे ही फिर जिम्मेदारी सौंपना सही विकल्प है?

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