रांची: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अनुराग गुप्ता और महाधिवक्ता राजीव रंजन की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि संवैधानिक पदों पर बैठे कुछ अधिकारियों ने अपनी निष्पक्ष जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के बजाय सरकार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के हितों को प्राथमिकता दी।
मरांडी ने कहा कि एक ओर जहां पूर्व डीजीपी पर सत्ता के संरक्षण में पनप रहे भ्रष्टाचार को छिपाने का आरोप है, वहीं महाधिवक्ता पर सरकार के निर्णयों को कानूनी वैधता प्रदान करने की कोशिश करने का आरोप लगाया गया। उन्होंने कहा कि ऐसे पदों पर आसीन अधिकारियों की जवाबदेही जनता और संविधान के प्रति होनी चाहिए।नेता प्रतिपक्ष ने राज्य में अवैध खनन, कथित शराब घोटाला, जमीन घोटाला, रंगदारी तथा ट्रांसफर-पोस्टिंग में अनियमितताओं जैसे मामलों का उल्लेख करते हुए सरकार की कार्यशैली पर प्रश्न उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता के धन का उपयोग इन मामलों पर पर्दा डालने और सरकार की छवि बचाने के लिए किया गया।
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि यदि डीजीपी और महाधिवक्ता जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारी सत्ता के पक्षधर बन जाएं, तो लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर होती हैं और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने अधिकारियों को चेताते हुए कहा कि सरकारें और पद बदलते रहते हैं, लेकिन जनता सब कुछ देखती और याद रखती है।उन्होंने संविधान की सर्वोच्चता पर जोर देते हुए कहा कि कोई भी पद किसी व्यक्ति या दल की जागीर नहीं है। उनके अनुसार, पद अस्थायी हो सकते हैं, लेकिन जवाबदेही, जनविश्वास और इतिहास का मूल्यांकन स्थायी होता है।


