रांची, झारखण्ड: पूर्व केन्द्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा का चाईबासा जिला प्रशासन द्वारा सामान्य शिष्टाचार एवं आवश्यक औपचारिकताओं का भी निर्वहन नहीं किया गया। जिस पर उन्होंने नाराजगी जताई है. इसी के साथ आदित्य साहू, बाबूलाल मरांडी, निशिकांत दुबे समेत भाजपा के कई नेता उनके समर्थन में उतरे हैं.भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने कहा है कि झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं जनजातीय समाज के सम्मानित नेता अर्जुन मुंडा जी के साथ चाईबासा परिसदन में जिस प्रकार का व्यवहार किया गया, वह केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक परंपराओं, प्रशासनिक मर्यादाओं एवं जनजातीय समाज के सम्मान का भी विषय है।पद स्थायी नहीं होते समय के साथ आते-जाते रहते हैं, लेकिन किसी व्यक्ति का योगदान, अनुभव एवं सामाजिक सम्मान सदैव महत्वपूर्ण रहता है। जो व्यक्ति राज्य के मुख्यमंत्री एवं देश के केंद्रीय मंत्री जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन कर चुके हो, उसके प्रति सामान्य प्रशासनिक शिष्टाचार एवं गरिमा का पालन किया जाना अपेक्षित था।
आदित्य साहू ने आगे लिखा, यह भी अत्यंत चिंताजनक है कि पूर्व मुख्यमंत्री श्री मधु कोड़ा जी के साथ भी चाईबासा में DC द्वारा असम्मानजनक व्यवहार किए जाने का मामला सामने आ चुका है। क्या यह अब एक परंपरा बनती जा रही है कि जनजातीय समाज के वरिष्ठ नेताओं की गरिमा की अनदेखी की जाए?वर्तमान झारखंड में हेमंत सोरेन के शासनकाल में लोकतांत्रिक मूल्यों, प्रशासनिक संवेदनशीलता एवं सामाजिक सौजन्यता की परंपराएं कमजोर पड़ती दिखाई दे रही हैं। पश्चिम सिंहभूम जैसे ऐतिहासिक एवं जनजातीय बहुल जिले में प्रशासन की इस प्रकार की उदासीनता अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण एवं चिंताजनक है।जनजातीय समाज के सम्मानित नेतृत्व के प्रति इस प्रकार का व्यवहार लोकतांत्रिक व्यवस्था एवं सामाजिक सम्मान की भावना को आहत करने वाला है।
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए झारखण्ड बीजेपी, बाबूलाल मरांडी, दीपक प्रकाश,आदित्य साहू, अर्जुन मुंडा को टैग करते हुए भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लिखा ”यह ग़लत है,लेकिन यह तो मैं 2019 से लगातार झेल रहा हूँ,मेरे और मेरे परिवार के उपर तो 52 केस दर्ज हैं सामूहिक लड़ाई ही राक्षसों का विनाश कर सकती है”
अर्जुन मुंडा ने एक्स पर चाईबासा प्रशासन के लिए जताई थी नाराजगी:
वर्तमान में मैं न तो विधायक हूँ, न सांसद और न ही मंत्री, किन्तु मैं झारखंड राज्य के मुख्यमंत्री तथा भारत सरकार में मंत्री के संवैधानिक पद पर रहा हूँ।पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अंतर्गत मेरा चाईबासा परिसदन में रात्रि विश्राम हुआ।किंतु यह अत्यंत खेद एवं चिंता का विषय है कि चाईबासा जिला प्रशासन द्वारा सामान्य शिष्टाचार एवं आवश्यक औपचारिकताओं का भी निर्वहन नहीं किया गया। यह स्थिति या तो प्रशासनिक शिष्टाचार एवं अनुभव की कमी को दर्शाती है,अथवा प्रशासनिक अकड़ को, या फिर राज्य सरकार के लोकतांत्रिक मूल्यों एवं सामान्य सामाजिक मर्यादाओं के प्रति उदासीनता को प्रकट करती है।पूर्व में प्रशासनिक व्यवस्था की एक स्वस्थ एवं सुदृढ़ परंपरा रही है कि जिले में आगमन करने वाले सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्तियों के…




