झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी “झिमड़ी परियोजना” को मिला दो वर्ष का विस्तार, 30 हजार से अधिक महिला किसान होंगी लाभान्वित…

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झारखंड में किसानों के जीवन में बड़ा बदलाव लाने वाली झारखंड माइक्रो ड्रिप इरिगेशन परियोजना (JHIMDI) ने अपनी सफलता की नई कहानी लिखी है। झारखंड स्टेट लाइव्लीहुड प्रोमोशन सोसाइटी, ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (JICA) के सहयोग से लागू इस परियोजना ने अप्रैल 2025 तक किसानों की आय और कृषि उत्पादकता में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की है।
परियोजना की सफलता और ग्रामीण किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश एवं ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडे सिंह के अथक प्रयास एवं मार्गदर्शन से झिमड़ी परियोजना को दो वर्ष 2027 तक का अवधि विस्तार किया गया है।
इस विस्तार से राज्य के 30 हजार से अधिक किसान सीधे लाभान्वित होंगे। वर्तमान में 9 जिलों के 30 प्रखंडों में 28,298 महिला किसान इस योजना से जुड़कर माइक्रो ड्रिप इरिगेशन तकनीक के माध्यम से सालभर खेती कर रही हैं। उन्हें वर्मी कम्पोस्ट, पॉली नर्सरी हाउस के साथ-साथ तकनीकी प्रशिक्षण और निरंतर सहयोग भी उपलब्ध कराया जा रहा है।

आय में दोगुनी बढ़ोतरी-
परियोजना से जुड़े किसानों की औसत वार्षिक शुद्ध आय रु 8,806 (बेसलाइन सर्वे) से बढ़कर रु 80,821 (2024–25) हो गई है। परियोजना से जुड़कर किसानों की आय में दोगुनी वृद्धि हुई है । ओरमांझी, कुरु और कांके जैसे इलाकों के किसान केवल रबी सीजन में ही रु 32,000 से रु 48,000 तक कमा रहे हैं।

फसल उपज में रिकॉर्ड सुधार-
औसत उपज 536 किलो से बढ़कर 1,318 किलो प्रति 0.1 हेक्टेयर प्रति सीजन हो गई है। आलू, लौकी और फूलगोभी जैसी फसलों ने बेहतरीन उत्पादकता दी, जबकि स्ट्रॉबेरी, मिर्च और मटर ने किसानों की नकदी आय को बढ़ाया।

सिंचाई में तकनीकी बदलाव-
परियोजना के तहत अब तक 28,298 माइक्रो ड्रिप इरिगेशन सिस्टम स्थापित किए गए हैं, जिनसे 2,829 हेक्टेयर क्षेत्र को लाभ मिला है। इससे पानी की बचत, सालभर खेती और बेहतर उत्पादन सुनिश्चित हुआ है।

किसानों को प्रशिक्षण और नई तकनीक-
13,000 से अधिक किसानों को प्रशिक्षण दिया गया है। 50 एफटीसी, 88 बीआरपी और 1,000 से ज्यादा सीआरपी किसानों तक तकनीकी सहयोग पहुंचा रहे हैं। 5,224 किसान Samiksha ऑनलाइन मॉड्यूल से भी जुड़े।

गुणवत्तापूर्ण बीज और जैविक खेती को बढ़ावा-
उन्नत बीज किस्मों, वर्मी कम्पोस्ट और जैव-कीटनाशकों का उपयोग तेजी से बढ़ा है। मिट्टी और नर्सरी सुधार के लिए 13,289 पॉली नर्सरी हाउस और 21,871 वर्मी कम्पोस्ट इकाइयाँ लगाई गई हैं।

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