अंजुमन मोहिबान उर्दू झारखंड की बैठक में तीन महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर हुई चर्चा

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हजारीबाग / अंजुमन मोहिबान उर्दू की चौथी बैठक शहर के चिश्तिया मुहल्ला स्थित पत्रकार अनवर फिदवी के मकान पर हुई। इस बैठक की अध्यक्षता स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया के सेवानिवृत्त जीएम फजल अली खान ने की। बैठक में उर्दू के मसले से संबंधित महत्वपूर्ण बातों पर चर्चा की गई। इस अवसर पर शिक्षक डॉ चांद निज़ामी अपने सम्बोधन में कहा कि माध्यमिक शिक्षा निदेशालय झारखंड सरकार के संकल्प संख्या 1833/6/7/2023 द्वारा स्कूलों को अपग्रेड किया गया है जिनकी संख्या 189 है। इस संकल्प के माध्यम से उर्दू के साथ स्थानीय और जनजातिय भाषाएँ साथ ही फारसी, अरबी और संस्कृत को भी शामिल किया गया है, छात्रों की संख्या के आधार पर इन सभी भाषाओं के लिए एक ही शिक्षक नियुक्त किया जाएगा। जाहिर है कि उर्दू भाषा के विधार्थीयों की संख्या को देखते हुए निश्चय ही गैर उर्दू भाषी शिक्षक नियुक्त किए जाएंगे जिस से उर्दू के पठन-पाठन पर कुप्रभाव पड़ेगा और इस भाषा के छात्र कालांतर में निश्चित रूप से उर्दू शिक्षा से वंचित रह जाएंगे। यही हाल प्लस टू स्कूलों का है, इन स्कूलों में भी उर्दू शिक्षकों की बहाली का कोई प्रावधान नहीं किया गया है। स्पष्टत: इन स्कूलों में भी उर्दू शिक्षा बाधित हो जाएगी। जिसका आगमी प्रभाव उर्दू के उच्च शिक्षा पर निश्चय ही पड़ेगा।
विनोबा भावे विश्वविद्यालय के पूर्व उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ जैन रामिश ने खेद व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले कई वर्षों से झारखंड एकेडमिक काउंसिल ने आलिम और फाजिल की परीक्षा लेने से गुरेज किया है। यह परीक्षा विश्वविद्यालय स्तर पर होनी थी परंतु अभी तक इसके लिए सरकारी स्तर पर कोई सुदृढ़ व्यवस्था नहीं की गई है। इसी क्रम में डॉ. जफरुल्लाह सादिक ने कहा वर्तमान परिस्थिति में आलिम और फाजिल के छात्रों के नुकसान की भरपाई कैसे की जा सकती है। इससे साफ है कि सरकार उर्दू की तरह मदरसा शिक्षा को भी चरणबद्ध तरीके से खत्म करना चाहती है। उन्होंने बताया कि उर्दू के साथ साथ मदरसों की उत्थान के लिए झामुमो के चुनावी घोषणापत्र में भी उल्लेख किया गया है जिसका पालन करने में सरकार विफल साबित हो रही है।
सेवानिवृत्त उपश्रमायुक्त शाहनवाज अहमद खान ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इस संदर्भ में जागरूकता भी एक अहम मुद्दा है। दरअसल उर्दू प्रेमियों को अभी भी अनुभव नहीं हो रहा है कि उर्दू के साथ किस किस स्तर पर चरणबद्ध तरीके से नाइंसाफी हो रही है। यह सर्वविदित है कि राज्य सरकार द्वारा उर्दू को दूसरी राजभाषा का दर्जा प्राप्त है। इसलिए हिंदी के साथ-साथ उर्दू भी एक अनिवार्य भाषा होनी चाहिए। इस संबंध में राजनीतिक दलों व प्रगतिशील शिक्षाविदों को आगे बढ़कर सीधे मुख्यमंत्री से बात करनी चाहिए। अन्यथा उर्दू गुमनाम होकर रह जाएगी। बैठक में आम राय बनी कि एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मुलाकात कर उर्दू के तमाम मसलों पर बातचीत करने की शुरुआत करें।
पत्रकार अनवर फदवी ने कहा कि अन्य उर्दू प्रेमी संगठनों को भी साथ लेकर चलना चाहिए।उन्होंने इस संदर्भ में कहा कि यह कारवां अपनी मंजिल तक पहुंचेगा।समाजसेवी शानुल हक ने कहा कि इस महत्वपूर्ण भाषा के मुद्दे को विधानसभा के सत्र में भी उठाने की जरूरत है। अजीम मॉडल स्कूल के मोहम्मद तामीर उद्दीन व साबिर हुसैन ने कहा कि इस समय झारखंड के सभी उर्दू प्रेमियों को एक साथ आना चाहिए तथा जागरूकता अभियान चलाना चाहिए। मौलाना इश्तियाक अहमद अशरक मिस्बाही ने कहा कि उर्दू भाषा को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
अंजुमन की पांचवीं बैठक जल्द ही पाबरा रोड स्थित डॉ.जकीउल्लाह मिस्बाही के मकान में होना सुनिश्चित है। उक्त बैठक में कमेटी की रूपरेखा पर विचार विमर्श किया जाएगा।
बैठक में अजीम खान, अख्तर हुसैन मिल्लत, डॉ. जकीउल्लाह मिस्बाही, मौलाना हैदर अली, डॉ. आशिक खान, आफताब हसन, इजाज सदफ, अरमान हसन, नैयर नौशाद, मोहम्मद मुस्तकिम आदि ने भी अपनी अपनी सलाह दी।

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