राजधानी पटना में भाजपा ने भले ही अपनी साख बचा ली, देहात में महागठबंधन का जलवा रहा। जिले की कुल 14 सीटों में से पांच पर एनडीए और नौ पर महागठबंधन के प्रत्याशी विजयी रहे। इस तरह महागठबंधन ने एनडीए से तीन सीटें झटक ली हैं। मोकामा विधानसभा सीट से राजद उम्मीदवार अनंत सिंह (78721 वोट) जीत चुके हैं। अनंत सिंह ने जदयू के राजीव लोचन नारायण सिंह (42964 वोट) को 35757 मतों से हराया है। इस प्रकार अनंत सिंह पांचवी बार मोकामा विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने हैं।
बाहुबली अनंत सिंह का आपराधिक इतिहास रहा है। इनके द्वारा दिये गये शपथ पत्र के अनुसार सन 1979 में पहली बार हत्या के मामले में आरोपित हुये। इनके विरुद्ध हत्या का पहला मामला पटना जिले के बाढ़ थाने में दर्ज हुआ था। अबतक इनके खिलाफ प्रदेश के विभिन्न जिलों में कुल 38 मामले दर्ज हैं। जिनमें पटना जिले में 34,लखीसराय 2,गया और मुंगेर में एक-एक मामले दर्ज हैं। इनमें हत्या के 6 मामले शामिल हैं। कई में इनके खिलाफ आरोप सिद्ध नहीं हुआ है। विधायक बनने के पूर्व ये 12 आपराधिक मामलों के आरोपित रहे। जबकि विधायक रहने के दौरान इनपर दोगने से भी अधिक 26 केस दर्ज हुये। जिनमें 4 हत्या के अलावा हत्या का प्रयास, धमकी, अपहरण, यूएपीए एक्ट सहित अन्य संगीन मामले दर्ज हैं। मोकामा विधानसभा से राजद प्रत्याशी अनंत कुमार सिंह अपने शपथ में बताया है कि 2005 तक उनके पास 2 लाख रुपये नकद,15 लाख की पॉलिसी और सौ ग्राम गोल्ड था। जबकि विधायक बनने के बाद 15 सालों में कुल चल सम्पत्ति 9 करोड़ 64 लाख हो गई। जिनमें खरीदगी अचल संपत्ति का मूल्य 56 लाख है। विरासत में उन्हें 27 लाख 50 हजार की सम्पत्ति मिली। उनपर सरकारी बकाया 7 लाख 59 हजार है। जबकि 40 लाख रुपये का बैंक का कर्ज है।
मोकामा, जिसकी पहचान टाल से है। और, टाल की मिट्टी सी फितरत है मोकामा की। जैसे टाल की काली मिट्टी पर पानी की दो बूंद पड़ जाए तो वह शरीर से चिपक जाती है और अगर धूप में सूख जाए तो वही मिट्टी ईंट सरीखा सख्त हो जाती है। मोकामा के लोग भी ऐसे ही हैं। अगर साथ दिया तो बाहुबली अनंत सिंह को हर परिस्थिति में जिताया और रुष्ट हुए तो किसी की नहीं सुनी। 1952 में बना मोकामा विधानसभा सीट शुरू से ही सामान्य सीट रही है। जातिगत आंकड़ों के अनुसार भूमिहार बहुल क्षेत्र है। लेकिन पिछले तीन दशक से यहां लगातार बाहुबली जीतते आए हैं। सूरजभान सिंह और अनंत सिंह जैसे बाहुबली यहां
प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। हालांकि इस बार के चुनाव में मोकामा की फिजां बदली हुई है। इस मौजूदा विधायक अनन्त सिंह राजद के टिकट पर चुनावी मैदान में हैं। वहीं जदयू ने स्वच्छ छवि वाले राजीव लोचन उर्फ अशोक नारायण को उम्मीदवार बनाकर अनंत सिंह को घेरने की तैयारी की है।
सारे उद्योग एक-एक कर हो गए बंद
बिहार का मिनी कोलकाता कहा जाने वाला मोकामा 80 के दशक तक उद्योग, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन का प्रमुख केंद्र रहा। फिर यहां बाहुबलियों की अदावत शुरू हुई और मिनी कोलकाता में एके-47 जैसे हथियार तड़तड़ाने लगे। तब से मोकामा की पहचान ही बदल गई। 1990 में विभिन्न आरोपों में घिरे अनंत सिंह (मौजूदा विधायक) के भाई दिलीप सिंह जनता दल के टिकट पर विधायक बने। तब से लगातार मोकामा का प्रतिनिधित्व बाहुबलियों के हाथ में है। इन तीस सालों में मोकामा में न तो कोई उद्योग धंधा लगा और न ही बाजार का विस्तार हुआ। आजादी के समय स्थापित बाटा, भारत वैगन, मैकडॉवेल, सूत मिल जैसे सारे उद्योग बंद हो गए। कभी इन उद्योगों में 6000 कर्मचारी थे। वहीं, 1.06 लाख हेक्टेयर में फैले मोकामा टाल को दोफसला बनाने का सपना आज तक पूरा नहीं हुआ। टाल के किसानों का दर्द ज्यों का त्यों है।
बीमार हो गया अस्पताल
मोकामा में स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति अच्छी नहीं है। मामूली रूप से जख्मी को भी रेफर कर दिया जाता है। नाजरथ अस्पताल आजादी के बाद से पूर्वी बिहार का प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र था, लेकिन एक दशक पहले इसे बंद कर दिया गया।
1952 जगदीश नारायण सिंह, कांग्रेस
1957 जगदीश नारायण सिंह, कांग्रेस
1962 सरयू नन्दन प्रसाद सिंह, निर्दलीय
1967 बी लाल, रिपब्लिक पार्टी ऑफ इंडिया
1969 कामेश्वर प्रसाद सिंह, कांग्रेस
1972 कृष्णा शाही, कांग्रेस
1977 कृष्णा शाही, कांग्रेस
1980 श्याम सुंदर सिंह धीरज, कांग्रेस
1985 श्याम सुंदर सिंह धीरज, कांग्रेस
1990 दिलीप सिंह, जनता दल
1995 दिलीप सिंह, जनता दल
2000 सूरजभान सिंह, निर्दलीय
2005 अनंत कुमार सिंह , जदयू
2010 अनंत कुमार सिंह, जदयू
2015 अनंत सिंह, निर्दलीय ranjana



