सीएम हेमंत सोरेन : वंचित और शोषित समाज के लोगों को जब तक उनकी पहचान नहीं मिलेगी…तब तक सामाजिक न्याय की बात करना श्रेयस्कर नहीं हो सकता

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मंगलवार को “इंडिया फॉर सोशल जस्टिस – शिफ्टिंग फोकस ऑन सोशल जस्टिस” विषय पर ऑल इंडिया फेडरेशन फॉर सोशल जस्टिस के दूसरे राष्ट्रीय सम्मेलन में विभिन्न दलों और विभिन्न राज्यों के नेता और गणमान्य व्यक्ति, सांसद और विधायक ने भाग लिया। जिसमें झारखण्ड मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी थे .कार्यक्रम को पूरे भारत में राष्ट्रीय और स्थानीय मीडिया द्वारा कवर किया गया है और लाइव फुटेज को न्यू महाराष्ट्र सदन, कस्तूरबा गांधी मार्ग (इंडिया गेट के पास), कनॉट प्लेस नई दिल्ली, 110001 पर सभी टीवी चैनलों और यूट्यूब चैनलों पर साझा किया गया।कार्यक्रम में करीब 30 ओबीसी एसोसिएशन ने हिस्सा लिया और अपना विचार कार्यक्रम की शुरुआत में प्रसारित किया .सम्मेलन को वर्चुअली संबोधित करते हुए तमिलनाडु मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने 50% आरक्षण सीमा को हटाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विभिन्न समुदायों की आबादी के अनुरूप कोटा आवंटित करने के लिए राज्यों को सशक्त बनाने के लिए यह आवश्यक है। यह कार्यक्रम नई दिल्ली में हुआ और इसमें विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं की आभासी भागीदारी देखी गई। वहीँ झारखण्ड सीएम ने भी द्वितीय कॉन्फ्रेंस में भाग लिया और अपना विचार रखा, उन्होंने कहा ”वंचित और शोषित समाज के लोगों को जब तक उनकी पहचान नहीं मिलेगी, जब तक विभिन्न क्षेत्रों में उनका प्रतिनिधित्व नहीं होगा, तब तक सामाजिक न्याय की बात करना श्रेयस्कर नहीं हो सकता। गरीब और जरूरतमंद लोगों के सामाजिक न्याय को लेकर आदरणीय दिशोम गुरु श्री शिबू सोरेन जी ने भी जीवनपर्यन्त संघर्ष किया। इस मुहिम के लिए तमिलनाडु के माननीय मुख्यमंत्री थिरु एमके स्टालिन जी को मैं अनेक-अनेक धन्यवाद देता हूँ और कॉन्फ्रेंस में शामिल विभिन्न दलों के वरिष्ठ नेताओं को जोहार करता हूँ।”

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