मरांडी:झारखंड में चहेते अधिकारियों को प्रभार देकर भ्रष्टाचार को संरक्षण क्यों दिया जा रहा?

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babulal

रांची: झारखंड में महत्वपूर्ण विभागों और संस्थानों में लंबे समय से अधिकारियों के प्रभार में बने रहने को लेकर भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूछा है कि आखिर नियमित नियुक्तियां क्यों नहीं की जा रही हैं और कुछ अधिकारियों को लंबे समय तक महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी सौंपे रखने के पीछे क्या वजह है।मरांडी ने TVNL के प्रबंध निदेशक (MD) के प्रभार का उदाहरण देते हुए कहा कि अनिल शर्मा जून 2021 से इस पद का प्रभार संभाल रहे हैं। उनके मुताबिक, पक्ष और विपक्ष के जनप्रतिनिधियों की ओर से मुख्यमंत्री से उन्हें हटाने की मांग किए जाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि करीब पांच वर्षों से एक ही अधिकारी इस पद पर बने हुए हैं।उन्होंने अन्य विभागों और संस्थानों में भी अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था पर सवाल उठाए। मरांडी के अनुसार, प्रशांत कुमार वित्त सचिव के साथ JSSC के प्रभारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जबकि प्रिया दुबे ACB का अतिरिक्त प्रभार देख रही हैं। इसी तरह अबु बकर सिद्दीकी, सुनील कुमार और राजीव लोचन बक्शी की विभिन्न विभागों एवं संस्थानों में अतिरिक्त जिम्मेदारियों को लेकर भी उन्होंने सवाल खड़े किए।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और IPRD को लेकर भी सवाल

मरांडी ने आरोप लगाया कि राजीव लोचन बक्शी को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में सदस्य सचिव के साथ-साथ सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (IPRD) में विशेष सचिव और निदेशक का प्रभार दिया गया है। उन्होंने दावा किया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में अध्यक्ष और IPRD में प्रधान सचिव के पद खाली रखे जाने से संबंधित व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठते हैं।उन्होंने पूछा कि क्या झारखंड में योग्य अधिकारियों की कमी है या फिर कुछ चुनिंदा अधिकारियों को ही महत्वपूर्ण पदों पर बनाए रखने के पीछे कोई विशेष कारण है।

‘प्रभार की व्यवस्था अपवाद होनी चाहिए, स्थायी व्यवस्था नहीं’

मरांडी ने कहा कि प्रभार की व्यवस्था अपवाद के तौर पर होनी चाहिए, न कि शासन चलाने का स्थायी तरीका। महत्वपूर्ण विभागों और संस्थानों की जिम्मेदारी लंबे समय तक अतिरिक्त प्रभार के भरोसे रहने से पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता प्रभावित होने की आशंका रहती है।उन्होंने मुख्यमंत्री से यह स्पष्ट करने की मांग की कि संबंधित पदों पर नियमित नियुक्तियां क्यों नहीं की जा रही हैं और अधिकारियों को लगातार अतिरिक्त प्रभार सौंपने का आधार क्या है।

भ्रष्टाचार के आरोपों पर जवाबदेही की चेतावनी

मरांडी ने अपने बयान में भ्रष्टाचार के आरोपों और अधिकारियों की जवाबदेही का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने चेतावनी दी कि पद पर रहते हुए किए गए कथित अनियमितताओं के मामलों में सेवानिवृत्ति को जवाबदेही से बचने का आधार नहीं माना जाना चाहिए।उनका कहना है कि सरकार को महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियों की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए।

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