रांची: SIR-2026 की प्रक्रिया को लेकर झारखंड छात्र संघ एवं आमया संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री के रवि कुमार से मुलाकात कर मांग पत्र सौंपा। प्रतिनिधिमंडल केन्द्रीय अध्यक्ष एस अली के नेतृत्व में झारखण्ड सिईओ से मिला।एस अली ने कहा कि वर्ष 2003 की मतदाता सूची में नाम, उपनाम, माता-पिता या पति के नाम, आयु और पारिवारिक विवरण में दर्ज पुरानी त्रुटियों के कारण वर्तमान SIR प्रक्रिया में कई नागरिकों को परेशानी हो रही है। बाद के वर्षों में कराए गए सुधार भी पुराने अभिलेखों से मैपिंग के दौरान विवाद का कारण बन रहे हैं।
प्रतिनिधिमंडल की प्रमुख मांगें
- 2003 की मतदाता सूची की पुरानी त्रुटियों को नागरिक की पात्रता के खिलाफ स्वतः निर्णायक आधार न बनाया जाए।
- बाद के वर्षों में संशोधित मतदाता अभिलेखों को भी उचित महत्व दिया जाए।
- प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं होने पर खतियान, वंशावली, पुराने सरकारी रिकॉर्ड, पारिवारिक दस्तावेज और शपथ-पत्र को सहायक साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया जाए।
- पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में ग्रामसभा, ग्राम प्रधान, मुखिया, वार्ड पार्षद और स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा पहचान, निवास और पारिवारिक संबंध की पुष्टि को परिस्थितिनुसार मान्यता दी जाए।
- केवल तकनीकी आयु संबंधी विसंगति के आधार पर मतदाता का दावा खारिज न किया जाए।
- Form-7 से नाम हटाने से पहले संबंधित मतदाता को नोटिस और प्रभावी सुनवाई का अवसर दिया जाए।
- जीवित व्यक्ति को मृत या गलत तरीके से स्थानांतरित बताकर किए गए संदिग्ध आवेदनों की जांच कराई जाए।
- SIR-2026 से जुड़े मामलों के लिए जिलों में विशेष हेल्प डेस्क/सिंगल विंडो व्यवस्था बनाई जाए।
- नोटिस प्राप्त नागरिकों को सुनवाई, दस्तावेज और निर्णय की स्थिति की जानकारी दी जाए तथा प्रतिकूल आदेश की स्थिति में कारणयुक्त आदेश उपलब्ध कराया जाए।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री के रवि कुमार ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि SIR-2026 में किसी भारतीय नागरिक का नाम नहीं छूटेगा। उन्होंने दिए गए सुझावों पर विचार करने का भरोसा भी दिलाया।




