रांची: बिहार में SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन/सत्यापन प्रक्रिया) के नाम पर 35 लाख से अधिक गरीब परिवारों के राशन कार्ड रद्द कर दिए गए हैं। झामुमो ने मामले को लेकर भाजपा पर निशाना साधा है.झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। झामुमो ने मामले पर कहा है कि यह केवल प्रशासनिक त्रुटि नहीं, बल्कि एक “सोची-समझी रणनीति” का हिस्सा है। पार्टी के अनुसार, SIR को बहाना बनाकर गरीब, आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदायों को मिलने वाली सरकारी सुविधाओं को खत्म करने की कोशिश की जा रही है।इसके अलावा झामुमो प्रवक्ता विनोद कुमार पांडे का कहना है कि यदि इस पर रोक नहीं लगी, तो भविष्य में पेंशन, कल्याणकारी योजनाएं और अन्य बुनियादी सुविधाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। झामुमो ने यह भी आरोप लगाया कि पहले झारखंड में पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास के कार्यकाल के दौरान 10 लाख से अधिक राशन कार्ड रद्द किए गए थे।
झामुमो ने एक्स पर कहा, SIR सिर्फ बहाना है।असल खेल है – गरीबों से उनके हक़ को छीनना। आज राशन कार्ड,कल पेंशन,परसों मइयाँ योजना,और उसके बाद बिजली, स्कूल इत्यादि। इनका लक्ष्य साफ़ है ना ग़रीब रहेंगे – ना उन्हें कोई सुविधा देनी होगी।
झामुमो ने आगे कहा, ”तो साफ़ है-झारखंड में फिर से SIR के बहाने वही स्क्रिप्ट दोहराने की तैयारी है। निशाना भी साफ है – आदिवासी, पिछड़े, शोषित और अल्पसंख्यक समुदाय।यह सिर्फ कागज़ों की जांच नहीं है, यह लोगों के अस्तित्व की जांच है।जब आपका नाम सूची से गायब होगा,तो सिर्फ एक कार्ड नहीं कटेगा, आपकी रसोई बुझ जाएगी,आपकी बुज़ुर्ग माँ की पेंशन रुक जाएगी,आपके बच्चों का भविष्य अंधेरे में चला जाएगा।सबसे खतरनाक बात यह है कि यह सब बहुत शांत तरीके से भाजपा करवा रही है – बिना शोर, बिना बहस, बिना जवाबदेही।आज अगर हम चुप रहे, तो कल हमारे अधिकार भी तकनीकी कारणों से खत्म कर दिए जाएंगे।SIR का समय है सावधान रहने का होगा, आवाज़ उठाने का होगा, और हर उस व्यक्ति के साथ खड़े होने का जिसका हक़ छीना जा रहा है।क्योंकि यह लड़ाई सिर्फ SIR का नहीं है – यह लड़ाई सम्मान, अधिकार और अस्तित्व की है।”




