रांची : झारखंड में JSSC CGL और 11वीं-13वीं JPSC समेत कई परीक्षाओं की नियुक्तियों को रद्द करने के हेमंत सोरेन सरकार के फैसले पर झारखंड हाईकोर्ट में शुक्रवार को महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। सरकार की ओर से जवाब दाखिल किए जाने के बाद अदालत ने नियुक्त अभ्यर्थियों को दी गई राहत (स्टे) बरकरार रखी है। यानी सरकार द्वारा नियुक्तियां रद्द करने के आदेश पर हाईकोर्ट की रोक जारी रहेगी। हेमंत सोरेन सरकार और JPSC ने कोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर दिया है। इससे पहले राज्य सरकार ने गड़बड़ियों की जांच के लिए मामला CID/SIT को सौंपते हुए स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में हाईकोर्ट को सौंपी थी।कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि शुरुआती तथ्यों को देखकर ऐसा बिल्कुल नहीं लगता कि शत-प्रतिशत यानी सभी नियुक्तियों में एक जैसी गड़बड़ी हुई है। अदालत ने टिप्पणी की, “गड़बड़ी के आरोप होने का मतलब यह नहीं कि सभी नियुक्त अभ्यर्थी दोषी हैं, इसलिए निर्दोष लोगों को बेवजह परेशानी नहीं होनी चाहिए।”हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले की जांच की निगरानी के लिए सेवानिवृत्त जज गौतम कुमार चौधरी को नोडल अधिकारी बनाने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि जांच जल्द ही किसी तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचे।कोर्ट ने यह भी संज्ञान में लिया कि करीब 2,700 नियुक्तियों को एक साथ रद्द करने का फैसला काफी व्यापक और गंभीर असर डाल सकता है, इसलिए बिना ‘प्रिंसिपल ऑफ नेचुरल जस्टिस’ (प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों) का पालन किए किसी को भी नियमित नौकरी से अचानक नहीं हटाया जा सकता।इस मामले की अगली सुनवाई अब 7 अक्टूबर 2026 को तय की गई है। तब तक के लिए नियुक्त अभ्यर्थियों के पदों पर कोई आंच नहीं आएगी।




