झामुमो विधायक चमरा लिंडा की एंट्री को लेकर चर्चा में है,वह लोहरदगा से चुनाव लड़ने की तैयारी में है.आपको बता दे की लोहरदगा सीट पर कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने अपने -अपने पार्टियों की घोसना कर दी है .पर अगर झामुमो से चमड़ा लिंडा मैदान में उतरते है तो गठबंधन टूट सकती है. जिसका पूरा फ़ायदा बीजेपी उठाएगी.लोहरदगा लोकसभा सीट को लेकर बेहद रोमांचिक स्थिति नजर आ रही है।चमरा लिंडा अगर चुनाव लड़ते है तो चुनाव लड़ने की स्थिति में चुनावी समीकरण बेहद दिलचस्प हो जाएगा.चमरा लिंडा 2004 में लोहरदगा लोकसभा सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पहली बार लोकसभा चुनाव लड़े थे .इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी की ओर से डॉक्टर रामेश्वर उरांव, भारतीय जनता पार्टी(बीजेपी) की ओर से प्रोफेसर दुखा भगत चुनाव मैदान में थे। जिसमे कांग्रेस पार्टी से डॉ. रामेश्वर उरांव जीत गए थे।उसके बाद साल 2009 के लोकसभा चुनाव की बात करें तो इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की ओर से सुदर्शन भगत, कांग्रेस पार्टी की ओर से डॉ. रामेश्वर उरांव और निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चमरा लिंडा चुनाव मैदान में थे। इस चुनाव में भी चमड़ा लिंडा को हार का सामना करना पड़ा था . भारतीय जनता पार्टी के सुदर्शन भगत ने जीत हासिल किया था। फिर साल 2014 के लोकसभा चुनाव में फिर एक बार चमरा लिंडा चुनाव मैदान में खड़ा हुए। हालांकि तब वह ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे। भारतीय जनता पार्टी की ओर से सुदर्शन भगत और कांग्रेस पार्टी की ओर से डॉ. रामेश्वर उरांव चुनाव मैदान में थे। इस चुनाव को भी सुदर्शन भगत ने जीत हासिल की. अब देखना दिलचप्स होगा की इस बार किसको सीट मिलती है.



