झारखण्ड : पूरा देश महंगाई की मार झेल रहा है, लेकिन झारखंड उन राज्यों में शामिल है जहां महंगाई का असर अपेक्षाकृत कम है। यहां आम लोगों के लिए जीवनयापन देश के कई अन्य राज्यों की तुलना में अधिक किफायती बना हुआ है। दैनिक उपयोग की अधिकांश वस्तुओं की कीमतें नियंत्रित हैं। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की अप्रैल रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, झारखंड की महंगाई दर 2.88% दर्ज की गई है, जो राष्ट्रीय औसत 3.48% से काफी कम है। इसका मतलब है कि राज्य में जरूरी सामानों की कीमतों में बढ़ोतरी राष्ट्रीय स्तर की तुलना में धीमी रही, जिससे लोगों की जेब पर कम असर पड़ा। सबसे कम महंगाई दर वाले राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की सूची में झारखंड 12वें स्थान पर है।झारखंड में महंगाई अपेक्षाकृत कम रहने की सबसे बड़ी वजह रसोई के बजट में मिली राहत है। रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल महीने में आलू की कीमतों में 23.69% और प्याज के दामों में 17.67% तक गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा मटर और चना जैसी दालों की कीमतों में भी करीब 6.75% की कमी आई। खाने-पीने की जरूरी वस्तुओं के सस्ते होने से आम लोगों को घरेलू खर्च संभालने में काफी राहत मिली है.
महंगाई दर (%) के हिसाब से राज्य / केंद्र शासित प्रदेश की रैंकिंग कुछ इस प्रकार है:
1.मिजोरम – 0.69%
2.छत्तीसगढ़ – 1.77%
3.दिल्ली (NCT) – 1.96%
4.लद्दाख – 2.02%
5.अरुणाचल प्रदेश – 2.07%
6.गोवा – 2.20%
7.मणिपुर – 2.33%
8.त्रिपुरा – 2.34%
9.जम्मू और कश्मीर – 2.67%
10.बिहार – 2.74%
11.गुजरात – 2.85%
12.झारखंड – 2.88%
इस लिस्ट में सबसे अंत पर 36 वें नम्बर पर 5.81% मंहगाई दर के साथ तेलंगाना है।
हालांकि, रिपोर्ट का दूसरा पक्ष यह भी बताता है कि झारखंड में सभी वस्तुएं सस्ती नहीं हुई हैं। ‘पर्सनल केयर’ यानी सौंदर्य प्रसाधन और निजी सेवाओं की कीमतों में 17.66% की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं चांदी के आभूषणों की कीमतों में 144.34% तक उछाल आया है, जिससे इन्हें खरीदना आम लोगों के लिए मुश्किल होता जा रहा है। सोने के गहने भी 40.72% महंगे हुए हैं। यानी साफ है कि रोजमर्रा की जरूरतों की चीजें भले किफायती हों, लेकिन विलासिता और आभूषण जैसी वस्तुएं लगातार महंगी होती जा रही हैं। ऐसे में सादगीपूर्ण जीवनशैली अपनाने वालों के लिए झारखंड अब भी अपेक्षाकृत कम खर्च वाला राज्य माना जा सकता है।




