लॉक डाउन के दौरान लोगो के राशन का बिल बढ़ा

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कोरोना वायरस के दिनों में इसमें अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई। उपभोक्ता उत्पादों के अधिकारियों का कहना है कि राशन की मांग काफी बढ़ गई है और इसका कारण साफ-सफाई और लोगों द्वारा घरों पर खाना बनाने को महत्वता देना है। स्पेंसर रिटेल और नेचर्स बास्केट के सीईओ देवेंद्र चावला ने कहा कि COVID -19 से पहले की तुलना में अब किराने के बिल में 1.5 गुना की बढ़ोतरी हुई है। लॉकडाउन के शुरू होने के वक्त इसमें अधिक बढ़ोतरी हुई थी , क्योंकि लोगों को ऐसा डर था की दुकानों पर सामान खत्म हो जाएगा।

लोग बिस्किट, नूडल्स, स्नैक के उत्पादों, हैंड वॉश, दाल, गेहूं और चीनी जैसे उत्पादों को भरी मात्रा में खरीद रहे हैं। रिटेल-टेक स्टार्टअप स्नेपबिज के सीईओ प्रेम कुमार ने दस लाख से ज्यादा किराना दुकानों के उपभोगताओं का विश्लेषण किया। उन्होंने कहा कि मार्च के पहले सप्ताह में एक बिल की माध्यिका 650 रुपये रही, जो अप्रैल के पहले सप्ताह तक बढ़कर 1,000 रुपये हो गई और अब वह 900 रुपये हो गई है।

“लोग बिस्किट, नूडल्स, स्नैक के उत्पादों, हैंड वॉश, दाल, गेहूं और चीनी जैसे उत्पादों को भरी मात्रा में खरीद रहे हैं। लोग पहले आम तौर पर मैगी नूडल्स के 4-6 वाले पैक्स को खरीदते थे , लेकिन जब से लॉक डाउन मे लोग 24 पैक्स वाले नूडल्स को खरीद रहे है । बिस्किट, पास्ता, आटा और दाल भी ज़्यादे मात्रा में ख़रीदे जा रहे है। ऐसा इसलिए क्योंकि लोग घरों पर हैं और ज्यादा चीजों का उपभोग कर रहे हैं- “मेट्रो कैश एंड कैरी इंडिया के एमडी और सीईओ अरविंद मैदिरत्ता ने यह कह।

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