कोरोना के दौरान महिलाओ को शिशु और स्तनपान के लिए उपयुक्त ने जागरूक किया

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● कोविड-19 के दौरान स्तनपान एंव शिशु आहार को लेकर बैठक कर उपायुक्त ने दिए महिलाओं को जागरूक
करने के निर्देश।

● कुपोषित उपचार वाहन चलाने को लेकर भी उपायुक्त ने दिए निर्देश, कहा योजनाबद्ध तरीके से करे वाहन का
उपयोग, जिससे कुपोषण दर को कम करने में मिलेगा अधिक सहयोग।

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उपायुक्त, श्री जितेंद्र कुमार सिंह ने समाहरणालय स्थित सभा कक्ष में बैठक कर कोविड-19 के दौरान स्तनपान एंव शिशु आहार से संबंधित स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी दिशा निर्देशों से महिलाओं को जागरूक करने को लेकर संबंधित पदाधिकारियों को निर्देशित किया गया।

● स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी मुख्य संदेश-

1. स्तनपान नवजात शिशुओं को बार-बार बीमार पड़ने से बचाता है तथा सम्पूर्ण शिशु एवं बाल्यावस्था में सुरक्षा
2. प्रदान करने में सहायता करता है।
3. शिशु को जन्म के एक घंटे के अंदर माँ का दूध पिलाएं और पहले 6 महीने सिर्फ स्तनपान कराएं।
4. यदि बच्चा बीमार है और वह कोविड-19 से संक्रमित है या उसकी संभावना है, तब भी माँ उसे अपना दूध पिलाती रहें।
5. यदि माँ स्तनपान नहीं करा सकती है, तो वह अपना दूध साफ कटोरी में निकाल सकती है और साफ कप या चम्मच से दूध पिला सकती है।
6. अगर माँ को बुखार, खाँसी या साँस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण है तो तुरंत डाॅक्टर से संपर्क करें। जब माँ बच्चे के संपर्क में रहे तथा खाँसते और छींकते समय अपने मुंह को रूमाल या टिष्यू से ढकें।
7. छींकने और खाँसने के बाद बच्चे को अपना दूध पिलाने से पहले और बाद में तथा किसी भी सतह को छूने से पहले और बाद में अपने हाथों को साबुन और पानी से 40 सेकंड या सैनिटाइजर से अच्छी तरह साफ करें।
8. बच्चे के तेज मानसिक व शारीरिक विकास की जरूरतों को पूरा करने के लिए उसके 6 महीने पूरे होने पर देखभालकर्ता बच्चे को माँ के दूध के साथ ऊपरी आहार खिलाना शुरू करें।

◆ कोविड-19 के दौरान स्तनपान एवं पूर्ण आहारः

1. शिशु को जन्म के एक घंटे के अंदर माँ का दूध पिलाएं और पहले 6 महीने सिर्फ स्तनपान कराएं-
● माँ का दूध नवजात षिषु को बीमार होने से बचाता हैं।
● माँ के दूध में एंटीबाॅडी होते है जो बच्चे की रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाता है और उसकी रोगों से रक्षा करता
है।
● माँ का दूध नवजात की बचपन में सुरक्षा करने में मदद करता है।

2. स्तनपान कराएं सावधानी के साथ, संक्रमण से करें बचाव-
अगर माँ को बुखार, खाँसी या साँस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण है तो वह –
● तुरंत डाॅक्टर से संपर्क करें
● डाॅक्टर की बताई गई बातों का पालन करें।
● ज्ब बच्चे के संपर्क में रहे तो मास्क पहनें।
● खाँसते और छींकते समय अपने मुह को रूमाल या टिष्यू से ढके।
● छीकने और खाँसने के बाद, बच्चे को अपना दूध पिलाने से पहले और बाद में अपने हाथों को साबुन और पानी
से 40 सेकंड तक धोएं।
● किसी भी सतह को छूने से पहले उसे साबुन या सैनिटाइजर से अच्छी तर साफ करें।

3. यदि माँ स्तनपान नहीं करा सकती है, तो वह अपना दूध साफ कटोरी में निकाल सकती हैं और साफ कप या
चम्मच से बच्चे को दूध पिला सकती है
● अपना दूध निकालने से पहले हाथों को साबुन व पानी से 40 सेकंड तक धोएं तथा जिस कटोरी या कप में दूध
निकाले उसे साबुन और पानी से अच्छी तरह धोएं।
● अपना निकला हुआ दूध पिलाते समय मास्क पहन कर रखें तथा अच्छे से साफ किए गए कप या चम्मच से ही
दूध पिलाएं।
● यदि माँ स्तनपान कराने व दूध निकालने के लिए बहुत बीमार है, तो वह एक अवधि के बाद फिर से अपना दूध
पिलाना शुरू करें।
● बच्चे को दूध पिलाने व उसकी देखभाल के लिए अन्य महिला की मदद लें।

5. यदि बच्चा बीमार है और वह कोविड-19 से संक्रमित है या उसकी संभावना है, तब भी माँ उसे अपना दूध
पिलाती रहें।

6. बच्चे के तेज मानसिक व शारीरिक विकास की जरूरतों को पूरा करने के लिए, उसके 6 महीने पूरे होने पर
देखभालकर्ता बच्चे कोः-
● माँ के दूध के साथ ऊपरी आहार खिलाना शुरू करें
● विभिन्न प्रकार के खाने जैसे दाल, दूध व दूध से बने पदार्थ, पीली, नारंगी और हरी सब्जियां व फल दे ताकि
उसका हर निवाला पोषण से भरपूर हो
● यदि लाॅकडाउन के दौरान ताजा फल-सब्जी या खना न मिले, तो अन्य खाद्य सामग्री काम में लांए।
● खाना बनाने, खिलाने या खाने से पहलें 40 सेकंड तक साबुन व पानी से हाथ धोएं
● खाना खिलाने से पहले बच्चे के हाथ भी साबुन व पानी से धोएं
● खाना बनाने वाले स्थान को साबुन व पानी से अच्छी तरह साफ करे।
● बच्चे को अलग कटोरी से खाना खिलाएं।
● बच्चे को साफ कटोरी और चम्मच से ही खाना खिलाएं।
● बीमारी के दौरान बच्चे को सामान्य मात्रा में भोजन अधिक बार खिलाएं और बीमारी के बाद सामान्य से ज्यादा
खाना खिलाएं।
● ऊपरी आहार की शुरूआत में देरी होने से बच्चे के शारीरिक व मानसिक विकास पर असर पड़ेगा और उसमें
कुपोषण का खतरा भी बढ़ेगा।
● 6 महीने-2-3 चम्मच खाना दिन में 2 से 3 बार
● 6 से 9 महीने- आधी कटोरी खाना दिन में 2 से 3 बार और 1 बार नास्ता
● 9 से 12 महीने-3/4 कटोरी खाना दिन में 3 से 4 बार और 2 बार नास्ता
● 1 से 2 साल- 1 कटोरी खाना दिन में 3 से 4 बार और 1 से 2 बार नास्ता

7. यदि माँ कोविड-19 से संक्रमित है या उसकी संभावना है, तब भी स्वास्थ्य कर्मचारी यह सुनिष्चित करें कि-
● कोविड-19 सबंधी स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए बच्चे को जन्म के पहले घंटे से 6 महीने तक केवल माँ का
दूध ही पिलाया जाएं
● सभी गर्भवती महिलाओं एवं माताओं को स्तनपान सबंधी परामर्ष दे और उनको स्तनपान करवाने में सहयोग करें
● माँ और षिषु एक साथ रहें और माँ अपनी त्वचा से षिषु की त्वचा को स्पर्ष कराकर दूध पिलाएं
● अपनी स्वास्थ्य संस्था में या अपने किसी भी कर्मचारी द्वारा दूध की बोतले निप्पल इत्यादि को बढ़ावा न दे।

8. शिशु के देख रेख एंव ेापद जव ेापद बवदजंबज के लिए अन्य महिला की सहयोग लिया जा सकता है।

9. किसी भी सतह को छूने के उपरान्त साबुन और पानी को हाथ को 40 सेकंड तक धोएं या हैंड सेनिटाइजर से
सेनिटाइज करें। ऐसे सतह जिन्हे अक्सर छुआ जाता है उन्हें नियमित रूप से डिटर्जेंट या 1℅ीलचवबीसवतपजम
ेवसनजपवद या ेंदपजप्रमत से विसंक्रमित करें।

10. बच्चे को ज्ञंदहंतवव डवजीमत ब्ंतम परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा प्रदान किया जा सकता है, जिनके पास
कोविड-19 संक्रमण के कोई लक्षण नही है।

उक्त सभी बिंदुओं की जानकारी महिलाओं के बीच पहुंचाने एवं उन्हें जागरूक करने हेतु उपायुक्त द्वारा संबंधित पदाधिकारियों को सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया गया।
इसके अतिरिक्त उपायुक्त ने कुपोषित उपचार वाहन के माध्यम से कुपोषण उपचार केन्द्र द्वारा मिलने वाली सुविधाओं को गाँवों तक उपलब्ध कराने हेतु संबंधित पदाधिकारियों को योजनाबद्ध तरीके से इसके इस्तेमाल का निर्देश दिया। जिससे चतरा जिले के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में कुपोषण दर को कम करने में सहयोग मिल सके।
इस बैठक में मुख्य रूप से उपविकास आयुक्त, निदेशक डी.आर.डी.ए, सिविल सर्जन चतरा, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, चतरा, हण्टरगंज, प्रतापपूर, कुन्दा, लावालौंग, सिमरिया, टण्डवा, इटखोरी, एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट फैलो, कुपोषण उपचार प्रभारी, हण्टरगंज, चतरा, टण्डवा ए.पी.एफ. चतरा, राजकुमारी फाउण्डेंसन चतरा, एम.ओ. आर.बी.एस.के समेत अन्य संबंधित मौजूद थे।

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★ कोरोना (ब्व्टप्क्-19) आपातकालीन डायल नंबरः
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◆ जिला नियंत्रण कक्ष- 06541-253219/253994/8987715936
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◆ जिला पुलिस नियंत्रण कक्ष- 6207273658/100
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◆ झारखंड टोल फ्री नंबर- 104, 181
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◆ राज्य नियंत्रण कक्ष- 0651-2261368/9955837428
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◆ रांची, रिम्स कॉल सेंटर- (0651)2542700
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◆ राष्ट्रीय कॉल सेंटर- 011-23978046
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★ चतरा
91232 51466
9162 65 0152
प्रखंड स्तरीय नियंत्रण कक्ष 947032 7257
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★ हंटरगंज
79 7041 5536
83403 96356
प्रखंड स्तरीय नियंत्रण कक्ष 8809783605
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★ प्रतापपुर
9631 670194
प्रखंड स्तरीय नियंत्रण कक्ष 8863004149
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★ कुंदा
8434174770
प्रखंड स्तरीय नियंत्रण कक्ष 8434174770
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★ कान्हाचट्टी
7481048488
8210871385
प्रखंड स्तरीय नियंत्रण कक्ष 8340305734
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★ सिमरिया
7079909683
8969338868
प्रखंड स्तरीय नियंत्रण कक्ष 6201406905
7004432360
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★ लावालौंग
7979853424
प्रखंड स्तरीय नियंत्रण कक्ष 6201524033
9431989500
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★ पत्थलगड़ा
9431798686
प्रखंड स्तरीय नियंत्रण कक्ष 8340793144
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★ गिद्धौर
6206831597
प्रखंड स्तरीय नियंत्रण कक्ष 9798864577
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★ इटखोरी
9006443691
7739341790
प्रखंड स्तरीय नियंत्रण कक्ष 8757748280
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★ मयूरहंड
9934147205
8409829350
प्रखंड स्तरीय नियंत्रण कक्ष 9102107494
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★ टंडवा
8521397878
8809815791
प्रखंड स्तरीय नियंत्रण कक्ष 9973467675
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’कोरोना वायरस’ संक्रमण से संबंधित किसी भी प्रकार की सहायता प्राप्त करने हेतु उक्त मोबाइल नंबरों पर संपर्क कर सकते है।
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